संत रविदास जी के जीवन और उनके सामाजिक संदेशों को मंच पर सजीव करने हेतु उमेश भाटिया एवं उनका समूह संत रविदास की जीवनी पर

सुकन्या सिंह की रिपोर्ट वाराणसी

वाराणसी के सांस्कृतिक वैभव को समर्पित एक महत्वपूर्ण आयोजन “संत रविदास महोत्सव” का आयोजन 30 एवं 31 जनवरी 2026 को रविदास पार्क, वाराणसी में किया जा रहा है। यह महोत्सव संत शिरोमणि रविदास जी के जीवन, विचारों और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक दर्शन को समर्पित है, जिसकी केंद्रीय भावना है –

मन चंगा तो कटौती में गंगा”

काशी के भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान द्वारा विश्व पटल पर स्थापित शहनाई वादन से महोत्सव का शुभारंभ दुर्गाप्रसाद प्रसत्रा एवं समूह द्वारा किया जाएगा। शास्त्रीय संगीत की गरिमामयी प्रस्तुति में पंडित देवाशीष डे का गायन, अंशुमान महाराज द्वारा सरोद एवं सितार वादन किया जाएगा।भक्ति एवं शास्त्रीय संगीत की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पं. गणेश प्रसाद मिश्रा एवं उनके शिष्य प्रातःकालीन रागों एवं भजनों की प्रस्तुति देंगे।

संत रविदास जी के जीवन और उनके सामाजिक संदेशों को मंच पर सजीव करने हेतु उमेश भाटिया एवं उनका समूह संत रविदास की जीवनी 

आधारित नाट्य प्रस्तुति देगा।

भजन परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ते हुए शिल्पायन के छात्र सामूहिक भजन गायन प्रस्तुत करेंगे।संत रविदास एक कवि थे इस लिए विशेषरूप से काव्य एवं विचारों के आदान-प्रदान के लिए आयोजित कवि सम्मेलन का संयोजन डॉ. मंजरी पांडेय द्वारा किया जाएगा।भारतीय लोक संस्कृति की रंगत को मंच पर लाने हेतु लोक कलाकारों द्वारा लोकगीत एवं लोकनृत्य की प्रस्तुतियाँ भी होंगी।सांस्कृतिक प्रस्तुति के अंतर्गत ताना-बाना समूह अपनी विशिष्ट प्रस्तुति देगा।महोत्सव का विशेष आकर्षण होंगे भजन सम्राट अनुप जलोटा, जिनकी भक्ति संगीत प्रस्तुति श्रोताओं के लिए आध्यात्मिक अनुभूति का केंद्र बनेगी। समस्त कार्यक्रम का संचालन अंकिता खत्री नादान करेंगी।प्रस्तुत करने का एक सशक्त प्रयास है।अतः हम मीडिया कर्मियों, कला प्रेमियों और समस्त काशीवासियों से इस दो दिवसीय भव्य महोत्सव में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने, सहभागिता करने आयोजक डॉ शुभंकर घोष के अनुसार, यह महोत्सव संत रविदास जी के समता, करुणा और आत्मिक शुद्धि के संदेश को समकालीन संदर्भों में और उपस्थित होने का आग्रह करते हैं।

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