सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानिया
जमानियां। खेल मैदानों की कमी के बावजूद, स्थानीय युवकों ने क्रिकेट के प्रति अपने जुनून को जीवित रखने के लिए अनोखा तरीका अपनाया है। वे पक्के बलुआ घाट चबूतरे को ही खेल के मैदान के रूप में उपयोग कर रहे हैं। यह उनके खेल के प्रति समर्पण को दर्शाता है। जहाँ संसाधनों की कमी भी उनकी प्रतिभा को नहीं रोक पा रही है। बताया जाता है। की संसाधनों का अभाव में नगर से लेकर गांवों में उचित खेल के मैदानों का घोर अभाव होने के चलते युवाओं का जुनून सर चढ़ कर बोलने लगी है। जिसके कारण क्रिकेट के प्रति दीवानगी के चलते कस्बा के युवा उपलब्ध स्थान (पक्का बलुआ घाट चबूतरा) का क्रिकेट खेलने के लिए रचनात्मक उपयोग कर रहे हैं। उत्कर्ष कुमार बर्नवाल, पीयूष गुप्ता, प्रिंस गुप्ता, रजत अग्रवाल,हर्षित अग्रवाल,प्रिंस वर्मा आदि सहित युवा क्रिकेट प्रेमियों का कहना रहा कि प्रतिभा के निखार में खेल कूद जैसे मैदान ( ग्राउंड ) ऐसी बाधाएं अक्सर खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने में रुकावट डालती हैं। ऐसी स्थिति में युवा क्रिकेटर मजबूर होकर पक्का बलुआ घाट चबूतरे को मैदान मानकर या फिर भी उसे मैदान ग्राउंड बनाकर खेलना जारी रखे हुए है। हालाँकि इस तरह के स्थानों पर खेलने से आने जाने वाले के साथ खेलने वालों को चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है। और यह क्रिकेट के पेशेवर अनुभव से कोसों दूर है। स्थानीय युवाओं को खेल को बढ़ावा देने के लिए बेहतर बुनियादी ढाँचे और सुविधाओं के लिए खेल मैदान की आवश्यकता है।