काशी हिंदू विश्वविद्यालय में जलवायु सहनशील कृषि एवं सतत विकास पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

सुकन्या सिंह की रिपोर्ट वाराणसी 

वाराणसी।काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कृषि विज्ञान संस्थान के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग द्वारा “क्लाइमेट रेज़िलिएंट एग्रीकल्चर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट: इनोवेशन एंड सॉल्यूशंस” विषय पर 5 से 7 फरवरी 2026 तक एक तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन स्वतंत्रता भवन, बीएचयू में किया जा रहा है। इस सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई), फिलीपींस तकनीकी सह-आयोजक के रूप में सहयोग कर रहा है।सम्मेलन के संयोजक एवं आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच कृषि के सतत विकास के लिए वैज्ञानिक नवाचारों, नीतिगत समाधानों एवं व्यावहारिक रणनीतियों पर वैश्विक विमर्श को आगे बढ़ाना है। आईआरआरआई की डॉ. स्वाती नायक इस सम्मेलन की सह-संयोजक हैं।आयोजन सचिव डॉ. जे. जोर्बन ने जानकारी दी कि इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के 24 राज्यों तथा 4–5 अन्य देशों से 500 से अधिक वैज्ञानिक, शिक्षाविद, नीति विशेषज्ञ, कृषि उद्यमी, फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FPO) के प्रतिनिधि एवं शोधार्थी भाग ले रहे हैं। यह सम्मेलन 21वीं सदी की सबसे बड़ी चुनौती—जलवायु परिवर्तन की स्थिति में विश्व खाद्य एवं पोषण सुरक्षा—पर विचार-विमर्श के लिए एक सशक्त वैश्विक मंच प्रदान करेगा। कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर यू.पी. सिंह ने बताया कि सम्मेलन का उद्घाटन समारोह 5 फरवरी 2026 को प्रातः 9:30 बजे आयोजित होगा, जिसकी अध्यक्षता बीएचयू के कुलपति प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी करेंगे। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. हिमांशु पाठक, महानिदेशक, अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क क्षेत्र फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT), हैदराबाद होंगे। विशिष्ट अतिथियों में पद्मभूषण प्रोफेसर रामबदन सिंह तथा बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रोफेसर पंजाब सिंह शामिल होंगे।सम्मेलन में देश-विदेश के 30 से अधिक प्रख्यात वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों द्वारा मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत किए जाएंगे, जिनमें प्रमुख रूप से पद्मभूषण प्रोफेसर रामबदन सिंह, पद्मश्री 2026 से सम्मानित डॉ. अशोक कुमार सिंह, ICRISAT के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक, जे.सी. बोस नेशनल फेलो डॉ. एन.के. सिंह, सर्बिया के डॉ. इविका डिमकिक, आईआरआरआई के डॉ. एंथनी, डॉ. स्वाती नायक, डॉ. सुरेश कडारू, डॉ. उज्ज्वल, डॉ. पल्लवी, डॉ. उमा महेश्वर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के निदेशक डॉ. एम. सुंदरम, डॉ. जी.पी. सिंह, डॉ. पी.के. राय, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. आनंदन सहित अनेक वरिष्ठ वैज्ञानिक शामिल हैं।सम्मेलन में 15 से अधिक एफपीओ की सहभागिता भी सुनिश्चित की गई है। एफपीओ, प्रगतिशील किसानों, प्रमुख वैज्ञानिकों एवं नीति-निर्माताओं के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की जाएगी, जिसके निष्कर्षों के आधार पर जलवायु परिवर्तन एवं उसके समाधान पर एक नीतिगत दस्तावेज (Policy Document) तैयार किया जाएगा।इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रमुख विषय इस प्रकार हैं—. जलवायु अनुकूल फसल किस्मों के विकास हेतु प्रभावी तकनीकें फसल सुधार के लिए जैव विविधता का संरक्षणमृदा स्वास्थ्य प्रबंधन एवं जल-संरक्षित कृषिस्मार्ट कृषि में एआई, ड्रोन, रिमोट सेंसिंग एवं नैनो तकनीक का उपयोग गुणवत्ता युक्त संकर बीजों में सुधार पशुधन उत्पादन में सतत विकास एवं वेस्ट रीसाइक्लिंग रणनीतियाँ कृषि एवं बागवानी फसलों में पोषण गुणवत्ता का संवर्धन

सम्मेलन से प्राप्त सुझावों के आधार पर तैयार किया गया नीतिगत दस्तावेज भारत सरकार को सौंपा जाएगा, जो जलवायु-स्मार्ट कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने तथा किसानों की आय एवं आजीविका सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।

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