अविमुक्तेश्वरानंद के सामने कुर्सी पर या आसन पर कोई नहीं बैठ सकता है सब लोग नीचे ही बैठते ह।
लेकिन 2017 में जब आजम खान उत्तर प्रदेश का मंत्री था तब बनारस में जाकर उनके मठ में इसे मिला था।
उनके सामने उनके बराबर की कुर्सी पर बैठा।
इतना ही नहीं आजम खान के साथ अभीमूत्रेश्वरानंद ने भोजन भी किया।अब आप समझ गए होंगे कि इनको हिंदुओं से नफरत क्यों है।हालांकि यह एक चुनावी लाभ के लिए था क्योंकि चुनाव चल रहा था ये मैसेज देना था कि सभी हिंदू साधू संत समाजवादी पार्टी के साथ हैं और अभीमुक्तेश्वरानंद ने अलीशेख यादव को लाठी लाठी कूटने पर माफ कर दिया है। फिर भी जनता ने अखिलेश यादव को हराया।और यही अविमुक्तेश्वरानंद कहते हैं कि अखिलेश यादव ने मुझे लाठी लाठी कुटा तो मैं उनको हराने का काम किया। यह व्यक्ति इतना बड़ा झूठा है और संत होकर भी झूठ बोलता है।हालांकि मैं अभीमुक्तेश्वरानंद की एक बात से सहमत हूं योगी जी अखिलेश यादव की तरह उन्हें नहीं समझाते।बिल्कुल क्योंकि योगी जी प्रेम से समझाते हैं अखिलेश यादव लाठी से समझाते थे।