सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां। ईदुल अजहा (बकरीद) की नमाज दो रकअत होती है। यह नमाज बिना किसी अज़ान और इक़ामत के जमाअत के साथ अदा की जाती है। और इसमें कुल छह जायज अल्लाहु अकबर’ (तकबीरें) कही जाती हैं। यह नमाज सूर्योदय के बाद और ज़ोहर की नमाज से पहले कस्बा के शाही जामा मस्जिद के सेकेट्री मौलाना तनवीर रजा ने बताया कि गर्मी के मौसम को देखते हुए। नमाज का समय सुबह 6.45 पर अमानत खान की मस्जिद पर 7 बजे तथा चार मीनार मस्जिद पठान टोली पर प्रबंधक शैयर खान वारसी ने बताया कि सुबह 6 बजकर 45 मिनट नमाज पढ़ी जाने का ऐलान किया गया। उन्होंने बताया कि नमाज शुरू करने से पहले दिल में ईद-उल-अजहा की दो रकअत नमाज, वाजिब 6 जायज तकबीरों के साथ पीछे इस इमाम के निय्यत की जाती है। पहली रकअत (6 जायज तकबीरें) इमाम के साथ पहला ‘अल्लाहु अकबर’ कहकर हाथ बाँध लें और सना (सुब्हानक अल्लाहुम्मा.) पढ़ी जाए है। इसके बाद इमाम तीन बार ‘अल्लाहु अकबर’ कहेगा, हर बार आपको कान तक हाथ उठाने हैं (तकबीर कहनी है) और हाथ छोड़ देने हैं। तीसरी बार तकबीर कहने के बाद आपको हाथ बाँध लेना हैं। इसके बाद इमाम साहब सूरह फातिहा और कोई सूरह पढ़ते है। जिसके बाद सामान्य रूप से रुकू और सजदा किया जाए। दूसरी रकअत में जब इमाम साहब सूरह की तिलावत पूरी करेंगे, तो रुकू में जाने से पहले अतिरिक्त तकबीरें (आमतौर पर पांच) कही जाएंगी। हर अतिरिक्त तकबीर पर हाथ कान तक उठाकर छोड़ने होंगे और अंतिम (छठी) तकबीर पर बिना हाथ बाँधे सीधे रुकू में यानि झुकना जाए। नमाज मुकम्मल होने के बाद इमाम साहब मिंबर पर खड़े होकर खुत्बा (उपदेश) देते है। नमाज के बाद “अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाहु, वल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, वलिल्लाहिल हम्द पढ़ना सुन्नत है। नमाज के लिए घर से निकलते समय अच्छे साफ कपड़े पहनना और इत्र लगाना सुन्नत है।