वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र गुप्ता की रिपोर्ट
वाराणसी –– साहित्यिक मंच एवं विद्याश्री न्यास के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को पंडित विद्या निवास मिश्र की जयंती के अवसर पर एक व्याख्यान माला का आयोजन राजकीय जिला पुस्तकालय वाराणसी के सभागार में किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर आनंद वर्धन शर्मा ने कहा कि काशी की साहित्यिक परंपरा में शिव प्रसाद मिश्र, रूद्र काशी के और नजीर बनारसी ऐसे नाम हैं जो काशी की जीवंत संस्कृति के संवाहक होने के साथ पाठकों के मन में बनारस को गहराई से समझने की उत्कंठा भी जगाते हैं। उन्होंने कहा कि काशी को सही रूप से जानने के लिए जितना भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रेम जोगनी पढ़ना आवश्यक है,ठीक उतना ही उतना ही रुद्र जी की अमर कृति “बहती गंगा ” को पढ़ना जरूरी है। रुद्र काशीकेय के अवदान पर डॉक्टर मीनाक्षी मिश्रा ने कहा कि वह आधुनिक हिंदी साहित्य और काशी की विलक्षण प्रतिभा संपन्न रचनाकार थे। उपन्यास, नाटक, कहानी, काव्य, गजल, गीत और निबंध सहित अनेक विधाओं का उन्होंने सृजन किया। डॉक्टर तमन्ना शाहीन ने नजीर बनारसी को अलमस्त शायर बताते हुए कहा कि वह सच्चे देशभक्त थे उनकी कविताएं हिंदी जगत में अत्यंत लोकप्रिय रहीं। विद्याश्री न्यास के सचिव डॉक्टर दया निधि मिश्र ने कहा कि काशी की सृजन परंपरा पर आयोजित यह व्याख्यान माला की 13 वीं कड़ी है, जो काशी के साहित्य की पहचान को सहेजने का प्रयास है।सन्तोष कुमार प्रीत ने एकल काव्यपाठ प्रस्तुत किया।कार्यक्रम का शुभारंभ कंचन सिंह परिहार के द्वारा प्रस्तुत की गयी सरस्वती वंदना से किया गया। इस कार्यक्रम का संयोजन कंचन सिंह परिहार ने संचालन शिवकुमार पराग ने धन्यवाद ज्ञापित नरेंद्र नाथ मिश्रा ने किया। इस अवसर पर डॉ राम सुधार सिंह, प्रकाश उदय, दीपेश चौधरी, गिरीश पाण्डेय, सन्तोष प्रीत, रामजतन पाल, विनोद कुमार सहित अनेक साहित्यकार एवं विद्यार्थी गण उपस्थित रहे