काशी विद्यापीठ : ललित कला विभाग में 42 कलाकारों की समूह कला प्रदर्शनी का उद्घाटन

सुकन्या सिंह की रिपोर्ट

वाराणसी। ललित कला विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के आजाद कला दीर्घा में टेक्नो ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशन लखनऊ विश्वविद्यालय एवं अतुल्य भारत ग्रुप की ओर से 42 कलाकारों की समूह कला प्रदर्शनी का सोमवार को उद्घाटन हुआ। मुख्य अतिथि संकाय प्रमुख, दृश्य कला संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. उत्तमा दीक्षित ने कहा कि अतुल्य भारत ग्रुप के कलाकारों में एक नया जोश दिख रहा है, जो आने वाले भविष्य में मिल का पत्थर साबित होगा।

राज्य ललित कला अकादमी, लखनऊ के अध्यक्ष एवं ललित कला विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि प्रदर्शनी में 42 कलाकारों की 46 चित्र एवं दो मूर्ति प्रदर्शित की गई है। प्रदर्शनी में डॉ. रास बिहारी शाह ने अपने चित्र में दिखाने का प्रयास किया है कि मनुष्य हमेशा एक जैसा नहीं रह सकता। समय काल के अनुसार जिंदगी में परिवर्तन आते रहते हैं। उन्होंने अपने दूसरे चित्र में म्यूरल चित्र का निर्माण किया है। जिसमें गणेश जी से वेदव्यास महाभारत की कल्पना को साकार करते हुए दर्शाया है। यह म्यूरल बोर्ड पर मोल्ड क्ले द्वारा बनाया गया है।

अंकिता चौधरी ने रामायण के कई प्रसंगों को लेकर पैनल म्यूरल बनाया है जो लोगों को देखने पर मजबूर कर रहा है। प्रदर्शनी में प्रीति कुमारी ने अपने चित्रों में दिखाने का प्रयास किया है कि मनुष्य की इच्छाएं कभी पूर्ण नहीं होती हैं वह सोचकर अपने मन ही मन में इच्छाओं को घोट देता है। प्रदर्शनी में गौरव कुमार ने शिव का गंगा अवतरण का दृश्य को व्यक्त करने का प्रयास किया है। इन्होंने दूसरे चित्र में तीन कबूतरों की खामोशी दिखाने का प्रयास किया, जो सराहनीय है। प्रदर्शनी में आदि जैन ने काली माता का मूर्ति बनाने का प्रयास किया है। उनके दूसरे मूर्ति गणेश जी की खाड़ी मुद्रा में मूर्ति का काफी भाव लिए हुए हैं। प्रदर्शनी में अक्षत चित्रांश ने सुनहरे अंडे को जिराफ देखकर उसमें मन में कोतुहल जाहिर किया है, जो काफी अच्छा है। नीरज बिंद ने अपने कृति में मानव आकृति मन में बहुत सारे विचार चलता रहता है लेकिन सभी विचार साकार होते नहीं दिखाई देते का प्रयास किया है। सौरभ गौतम ने वराह अवतार को जल रंग द्वारा बनाने का प्रयास किया है। सौम्या उपाध्याय ने कृष्ण के बाल रूप को दो चित्रों में व्यक्त किया है। युवराज ने अपने चित्र में प्रकृति को दर्शाने का प्रयास किया है। इन्होंने चित्र में एक मोर और मनुष्य के हृदय को दर्शाने का प्रयास किया है। इस अवसर पर प्रो. मंजुला चतुर्वेदी, प्रो. अनुराग कुमार, डॉ. सुनील कुमार सिंह कुशवाहा, डॉ. मदन प्रसाद गुप्ता, डॉ. शत्रुघ्न प्रसाद, डॉ. राम राज, डॉ. स्नेहलता कुशवाहा, शालिनी कश्यप, एस एंजेला आदि उपस्थित रहे।

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