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गोपलगंज (बिहार) में गोंड समुदाय के पेन ठाना पर प्रशासनिक कार्रवाई: आदिवासी आस्था पर आघात

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कार्यालय प्रतिनिधि की रिपोर्ट 

 काशी दीप विजन*भारत विविध आस्थाओं, संस्कृतियों और परंपराओं का देश है, जहाँ प्रत्येक धर्म और समुदाय को अपने श्रद्धास्थलों के निर्माण और संरक्षण का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। देश के कोने-कोने में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्चों का निर्माण और विस्तार हो रहा है, जो धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सम्मान का प्रतीक है।

किन्तु अत्यंत दुःख और चिंता का विषय है कि बिहार के गोपालगंज में देश की मूलनिवासी गोंड जनजाति द्वारा अपनी पारंपरिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक *“पेन ठाना”* (देवस्थल) का निर्माण किया जा रहा था, जिसे प्रशासन द्वारा जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया गया। यह घटना केवल एक निर्माण को तोड़ने की नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आस्था, परंपरा और अस्तित्व पर गहरा आघात है।

पेन ठाना गोंड समाज के लिए मात्र एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक विरासत, पूर्वजों की स्मृति और प्रकृति से जुड़े आध्यात्मिक संबंध का केंद्र है। ऐसे स्थल आदिवासी समाज की पहचान और उनके सामुदायिक जीवन के आधार होते हैं। यदि इन्हें बिना संवाद, संवेदनशीलता और उचित वैधानिक प्रक्रिया के नष्ट किया जाता है, तो यह सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत प्रतीत होता है।

भारत का संविधान सभी नागरिकों को अपनी संस्कृति और धर्म के पालन का अधिकार देता है। यदि किसी अन्य समुदाय के धार्मिक स्थलों के प्रति सम्मान और संरक्षण अपेक्षित है, तो आदिवासी समुदाय की आस्था के प्रति भी वही संवेदनशीलता और सम्मान अनिवार्य है। प्रशासन का कर्तव्य है कि वह न्यायपूर्ण और निष्पक्ष व्यवहार करे, न कि किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला कदम उठाए।

हम इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की कड़ी निंदा करते हैं और प्रशासन से मांग करते हैं कि—

इस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

गोंड समाज के पेन ठाना के पुनर्निर्माण हेतु प्रशासन सहयोग प्रदान करे।

भविष्य में आदिवासी धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक प्रतीकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

आदिवासी समाज की आस्था और अस्मिता का सम्मान करना केवल एक समुदाय का नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान है।

गोंड समाज की धार्मिक भावनाओं पर यह आघात पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है, और हम सभी को इसके विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए।

रामसिंह ककोड़िया – केजीएम 

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