सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां। चैत माह का डाला छठ (चैती छठ) चैत्र शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक मनाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र सूर्य उपासना पर्व है। चैत्र नवरात्रि के दौरान मंगलवार मनाया जाने वाला यह पर्व (मुख्यतः चैत्र शुक्ल षष्ठी को) सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। जिसमें 36 घंटे का कठिन उपवास, नहाय-खाय, खरना, और संध्या-ऊषा अर्घ्य के साथ पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए पूजा की गई। बताया जाता है। की मंगलवार पक्का बलुआ घाट गंगा नदी दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से सैकड़ों महिलाएं गाजे बाजे के साथ पहुंची। 24 मार्च को (अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य) ऊषा अर्घ्य व पारण और डूबते सूर्य को अर्घ्य और व्रत समापन) किया गया। पुजारी उद्धव पांडेय ने बताया कि पौराणिक मान्यता माना गया है। कि द्वापर युग में द्रौपदी ने पांडवों की रक्षा और आरोग्य के लिए चैती छठ का व्रत किया था। यह पर्व अत्यंत कठिन नियमों, उपवास और शुद्धता के साथ मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि लोक आस्था के साथ यद्यपि मुख्य छठ कार्तिक में होती है। लेकिन चैत माह की छठ का भी विशेष महत्व है। पांडेय ने कहा कि चैत्र महीने में होने वाले चार दिवसीय महापर्व में व्रती अपनी संतान की लंबी आयु के लिए भगवान सूर्यनारायण की आराधना करती हैं। कार्तिक माह में होने वाली छठ पूजा की तरह ही चैत्र में भी छठी मैय्या और सूर्य देव की पूजा का विधान है। बताया जाता है। की लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय से हो गई है। चार दिवसीय महापर्व में व्रती अपनी संतान की लंबी आयु के लिए भगवान सूर्यनारायण की आराधना करती हैं। श्रद्धालु विशेष तौर पर सूर्य देव को अर्घ्य देकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। चैत्र छठ पूजा में भी छठी मैय्या और सूर्य देव की पूजा का विधान है। छठ व्रत बहुत कठिन माना जाता है। नियमों के अनुसार 36 घंटे तक व्रत रखा जाता है। छठ मैया की भक्ति में समर्पण, पवित्रता और अनुशासन का विशेष महत्व है। इस दौरान सुश्री एसडीएम ज्योति चौरसिया, तहसीलदार राम नारायण वर्मा के अलावा कोतवाली प्रभारी निरीक्षक रामसजन नागर सुरक्षा के मद्देनजर गंगा घाट के आसपास पुरुष और महिला पुलिस कर्मियों के संग चक्रमण भ्रमण करते रहे।