जमदग्नि ऋषि से जुड़ी कुछ रोचक किंवदंतियां प्रचलित हैं

सलीम मंसूरी की रिपोर्ट

जमानियां। गाजीपुर जिले के जमानियां (उत्तरवाहिनी गंगा तट) में महर्षि जमदग्नि के भव्य स्मारक स्थल और प्रतिमा स्थापित करने का कार्य तेजी से प्रगति पर हैl लगभग ₹1 करोड़ की लागत से बनने वाले इस पार्क और मूर्ति का भूमिपूजन विगत माह पहले नगर पालिका परिषद द्वारा किया जा चुका हैl इस परियोजना से जुड़े कुछ मुख्य विवरण इस प्रकार हैं। स्थान जमानियां, ब्लॉक तिराहा के पास, एनएच-24 (NH-24) कार्य की प्रकृति महर्षि जमदग्नि (भगवान परशुराम के पिता) की मूर्ति की स्थापना और एक विशाल स्मारक पार्क का निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। पालिका अध्यक्ष जय प्रकाश गुप्ता ने बताया कि जमानियां को महर्षि जमदग्नि की तपोस्थली के रूप में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान दिलाने के लिए लगातार कार्य किये जा रहे है। उन्होंने बताया कि जमदग्नि ऋषि की प्रतिमा व भव्य स्मारक के रूप में जमानियां मे विकास के रूप में देखा जा रहा है। जिसका यह एक अद्भुत और आध्यात्मिक अनुभव है। गुप्ता ने कहा कि यह भव्य स्मारक निर्माण हो जानेवपर आनंददायक के साथ चारों ओर फैली मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता के रूप में दिखाई देगी। इसके साथ ही बताया कि सबसे पुरानी लोकतांत्रिक व्यवस्था की भूमि जमानियां मे विकास की पहली नींव रखने के साथ निर्माण कार्य प्रगति पर है। जमदग्नि ऋषि भव्य स्मारक स्थल निर्माण होने के बाद एक विकास की नई किरण से जगमंगा उठेगी। जिसका शानदार प्रतीत के रूप में पहचान बनाएगी। बताया जाता है। की नगर पालिका परिषद अध्यक्ष जय प्रकाश गुप्ता ने कस्बा बाजार को विकास से जोड़ने के लिए राजकीय बालिका इंटर कालेज एवं एन एच 24 से सटी बाउंड्री पर जमदग्नि ऋषि प्रतिमा स्थापित कराने के लिए भव्य स्मारक स्थल का जोरशोर से निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण कार्य पूरी धार्मिक प्रतीक एवं सुंदर नक्काशीदार और मनमोहक, सुंदरता का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। प्रमुख देवता जमदग्नि ऋषि पर ध्यान केंद्रित कर निर्माण स्थल पर कार्य चल रहा है। ब्राह्मण पुजारी उद्धव पांडेय ने बताया कि जमदग्नि ऋषि ब्रह्मा, विष्णु और महेश के उपासक थे। उनकी गहन प्रार्थनाओं से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उनके सामने प्रकट होकर उन्हें वरदान मांगने को कहा। जमदग्नि ऋषि ने ध्यान के लिए एक एकांत और प्रकृति की गोद में स्थित स्थान मांगा। उन्होंने यह भी कहा कि जबकि न्याय व्यवस्था जगमदानी ऋषि के नियंत्रण में रखी गई थी। प्रशासन में कोई विवाद उत्पन्न होने पर उसका समाधान न्याय पालिका द्वारा किया जाना था। उन्हें वहां प्रचलित रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करना अनिवार्य था। पांडेय ने बताया कि ऋषि जमदग्नि एक आदर्श ध्यान स्थल की खोज करते हुए अपने साथ देवताओं की अठारह मूर्तियाँ लेकर चल रहे थे । ये मूर्तियाँ विश्व देवताओं का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व थीं।

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