सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां। मोहम्मद आतिर रज़ा उम्र 12 साल् 30 रोज़े रखे सेन्त् मेरिज़ कान्वेंट स्कूल क्लास 6 रोज़े रख के फाइनल इम्तेहान भी दिया। और सबको किया प्रभावित| माह ए रमज़ान का पवित्र महीना में इस बीच 10 वर्षीय मोहम्मद आतिर रजा की निष्ठा और हिम्मत ने सभी को प्रेरित किया है। मोहम्मद आतिर रजा ने इस माह ए रमज़ान की पूरी शिद्दत के साथ 30 रोज़ा रखा। जबकि उसने कुरान-ए-पाक मुकम्मल किया था। उसकी यह दृढ़ इच्छाशक्ति परिवार और स्थानीय लोगों के लिए मिसाल बन गई है। छोटी उम्र में बड़ी प्रेरणा मोहम्मद आतिर रजा ने माह ए रमज़ान की शुरुआत से ही रोज़ा रखने को लेकर उत्साहित था। उनके अब्बा मौलाना तनवीर रजा ने उसकी कम उम्र को देखते हुए। बच्चे को सेहरी के लिए उठाया। उसने स्पष्ट किया कि वह रोज़ा रखना चाहते है। रजा की दृढ़ स्वर में कहा कि अल्लाह पाक की सबसे अनमोल माह ए रमजान का रोज़ा रखूंगा। जिसके बाद पूरे दिन इबादत और कुरान का पाठ में मश्गूल हुआ। नमाज़ पढ़कर और कुरान का पाठ करते हुए बिताया। शाम को उसके लिए उसकी पसंद की इफ्तारी बनाई गई। उसकी इस लगन और भक्ति ने परिवार और आसपास के लोगों को बेहद प्रभावित किया। मोहम्मद आतिर रजा की हिम्मत और नीयत का प्रतीक, इस प्रयास की सराहना करते हुए। स्थानीय लोगों ने कहा कि रोज़ा केवल हिम्मत और सही नीयत से होता है। जो मोहम्मद आतिर रजा ने अपने इस कदम से यह संदेश दिया। कि रोज़ा अल्लाह की रज़ा के लिए और आत्मा की मजबूती का प्रतीक है। 10 वर्ष के मोहम्मद आतिर रजा ने न केवल कुरान-ए-पाक मुकम्मल किया। बल्कि 30 रोज़ा रखकर अपने परिवार और समाज को यह दिखा दिया। कि सच्ची लगन और विश्वास से हर उम्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।