जाति और #आरक्षण के बारे में मैं आपको सबसे आसान शब्दों में समझाने की कोशिश करता हूं,जातिवाद बीमारी है

आरक्षण उसकी दवाई है,और जो दवाई बंद करवाकर बीमारी मिटाने का दावा करते हैं, वे या तो डॉक्टर नहीं, या मरीज को मारना चाहते हैं। संविधान का रास्ता ही इस देश का रास्ता है, बाकी सब बहाने हैं, बातें हैं, बातों का क्या?

आप क्या सोचते हैं — असली समस्या जाति है, या जाति देखने वाली नज़र?

आज सोशल मीडिया पर फिर वही पुराना ढोल पीटा जा रहा है ।

1. “#आरक्षण हटा दो, #जातियां खत्म हो जाएंगी!”

2.“#जाति #प्रमाण पत्र बंद कर दो, जातिवाद मिट जाएगा!” वाह! क्या क्रांतिकारी विचार है,आप के कहने का सीधा मतलब हमे ये समझ आता है कि😀👉

3. #रेप का #कानून खत्म कर दीजिए — रेप होना अपने आप बंद हो जाएगा।

4. #हत्या की धाराएं हटा दीजिए — #कत्ल खुद रुक जाएंगे।

5.#चोरी का केस दर्ज करना बंद कर दीजिए — चोर #साधु बन जाएंगे।

6.यह वही मानसिकता है जो कहती है कि “#बीमारी इसलिए है क्योंकि #दवाई है।” अरे भाई, थर्मामीटर तोड़ने से बुखार नहीं उतरता! आरक्षण जातिवाद का कारण नहीं, परिणाम है — हजारों साल के सामाजिक अन्याय का संवैधानिक उपचार है सेवा जोहार 🙏

@B.K Gondvansi

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