कार्यालय प्रतिनिधि की रिपोर्ट
आगरा (इंद्र यादव) उत्तर प्रदेश!अगर आप सोचते हैं कि पुलिस का काम सिर्फ अपराधियों को पकड़ना है, तो अपनी जानकारी दुरुस्त कर लीजिए! आगरा के खंदौली टोल प्लाजा पर तैनात एक ‘दरोगा जी’ ने कानून की एक ऐसी नई धारा ईजाद की है, जो शायद अभी तक संविधान की किताबों में भी नहीं छपी। दरोगा जी का मानना है कि “किसान फॉर्च्यूनर में नहीं चल सकता!”
जी हां, आपने सही पढ़ा। अब आपकी योग्यता का पैमाना आपकी खेती या बैंक बैलेंस नहीं, बल्कि दरोगा जी का ‘स्टीरियोटाइप’ विज़न है।
दरोगा जी के ‘स्वर्ण नियम‘!
माफिया दोस्त!आप बड़ी गाड़ी में चल सकते हैं।
बैंक दलाल? स्वागत है!
दो कौड़ी के नेता! रेड कार्पेट बिछाया जाए।
मेहनतकश किसान? भाई साहब, आप तो बैलगाड़ी के लिए बने हैं, फॉर्च्यूनर में बैठ कर कहीं देश की तरक्की तो नहीं दिखा रहे
प्रत्यक्षदर्शियों का क्या कहना है!
दरोगा जी इतने आत्मविश्वास में थे कि उन्हें लगा शायद सड़क परिवहन विभाग ने रातों-रात “किसान एक्ट” पास कर दिया है। वर्दी का ऐसा रौब कि किसान की फॉर्च्यूनर उन्हें ‘कानूनी अपराध’ दिखने लगी।
शायद दरोगा जी को लगता है कि किसान का काम सिर्फ पसीना बहाना है, एसी की हवा खाना तो उनके (या उनके चहेते माफियाओं के) नसीब में लिखा है। दरोगा जी का यह ‘लॉजिक’ सुनकर न्यूटन भी अपनी गुरुत्वाकर्षण की थ्योरी छोड़कर सिर पकड़ लेते।
हमारी सलाह!
किसान भाइयों, अगली बार फॉर्च्यूनर निकालें तो साथ में एक ‘दलाल सर्टिफिकेट’ या ‘माफिया एफिडेविट’ ज़रूर रखें, वरना आगरा वाले साहब का बीपी बढ़ सकता है। दरोगा जी, वर्दी का काम कानून का पालन करना है, लोगों के ‘सपनों और स्टेटस’ पर पहरा देना