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दवाई से डरते थे बचपन में हम सभी,आज क्या हो गया दिल को

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दवाई से डरते थे बचपन में हम सभी,                        आज क्या हो गया दिल क

बड़े क्या हुए कि इश्क़ में शराब पीने लगे।            मासूमियत का दौर था, आँचल में थे ख़्वाब,

हक़ीक़त से टकराए तो ख़्वाब पीने लगे।                      जिन हाथों में खिलौने थे, उन हाथों ने जनाब,

वक़्त के ज़ख़्म मिले तो सैलाब पीने लगे।                    होश की बातें अब कौन हमसे करे साहब,

दर्द ने जब हदें तोड़ीं, हिसाब पीने लगे।                  आलोक, जो बचाते थे सबको नशे से कभी,

ख़ुद टूटे इस कदर कि बेहिसाब पीने लगे।              वैवाहिक संघ वाराणसी अध्यक्ष आलोक शास्त्री

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