नगर निगम ने शुरू किया एकीकृत सम्पत्ति कर बिल अभियान
— उपासना स्थलों को गृहकर से राहत, वसूली बढ़ाने पर जोर
वाराणसी, काशी दीप विजन ब्यूरो: नवीन प्रकाश।
नगर निगम, वाराणसी द्वारा गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में वित्तीय वर्ष 2025-26 से लागू की गई नई कर व्यवस्था की जानकारी दी गई। निगम अधिकारियों ने बताया कि अब नगर निगम क्षेत्र के भवनों पर गृहकर, जलकर एवं सीवरकर को मिलाकर एकीकृत सम्पत्ति कर बिल जारी किया जा रहा है।
पूर्व में भवनों पर अलग-अलग गृहकर तथा जलकल विभाग द्वारा जलकर व सीवरकर के पृथक बिल जारी होते थे। लेकिन उत्तर प्रदेश शासन के 9 मई 2025 के आदेश के क्रम में नगर निगमों में एकीकृत बिल प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए गए थे। उसी के अनुपालन में वाराणसी नगर निगम ने पहली बार वर्ष 2025-26 में संयुक्त सम्पत्ति कर बिल जारी करने की प्रक्रिया शुरू की है।
नगर निगम ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष के शेष लगभग चार महीनों में निर्धारित राजस्व लक्ष्य की पूर्तिके लिए 20 हजार रुपये से अधिक सम्पत्ति कर बकाया वाले भवनों पर डिमाण्ड आफ नोटिस जारी किए गए हैं।प्रेस वार्ता में यह भी स्पष्ट किया गया कि नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 175 एवं 177 के तहत चैरिटेबल ट्रस्टों, स्कूलों, कॉलेजों एवं सार्वजनिक उपासना स्थलों को गृहकर से छूट प्राप्त है, हालांकि जलकर और सीवरकर से उन्हें मुक्त नहीं किया गया है।इसी क्रम में पातालपुरी मठ से संबंधित भवन संख्या के-66/3 एवं के-66/4 पर सम्पत्ति कर बकाया होने के कारण 7 नवंबर 2025 को डिमाण्ड नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद मठ के प्रतिनिधि द्वारा 9 नवंबर 2025 को कर मुक्त किए जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया। मामले पर त्वरित संज्ञान लेते हुए नगर निगम ने अधिनियम की धाराओं के तहत भवन संख्या के-63/3 को गृहकर से मुक्त कर दिया है।नगर निगम ने यह भी बताया कि वर्तमान में विशेष अभियान के तहत सार्वजनिक उपासना स्थलों को गृहकर से मुक्त किए जाने के लिए चिन्हिकरण की कार्यवाही जारी है। इसके अंतर्गत कोतवाली जोन में अब तक 40 उपासना स्थलों को चिन्हित किया जा चुका है।नगर निगम अधिकारियों ने कहा कि एकीकृत कर प्रणाली से न केवल करदाताओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि निगम की राजस्व व्यवस्था भी अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ होगी।