दिव्य प्रकाश गुप्ता की रिपोर्ट वाराणसी*मंदिर से 2 किमी तक लगी लंबी कतार, मां का हुआ भव्य स्वर्ण श्रृंगार चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर आज चौथे दिन देवी भगवती के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा-अर्चना श्रद्धा और उल्लास के साथ की जा रही है। काशी के दुर्गाकुंड स्थित प्रसिद्ध दुर्गा माता मंदिर में तड़के भोर से ही श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखने को मिला। भक्तों की आस्था का आलम यह रहा कि मंदिर परिसर से लगभग 2 किलोमीटर तक लंबी कतारें लगी रहीं।
मंदिर में आज मां कूष्मांडा का भव्य स्वर्ण श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे। “जय माता दी” के जयकारों और भक्ति गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
मां कूष्मांडा: सृष्टि की आदिशक्ति और पर्यावरण की अधिष्ठात्री
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य शक्ति से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति माना जाता है।
मां कूष्मांडा को प्रकृति और पर्यावरण की अधिष्ठात्री देवी भी कहा जाता है। उनकी उपासना के बिना जप, तप और ध्यान अधूरा माना जाता है।
मंदिर के महंत दीपू दुबे के अनुसार, मां को गुड़हल का फूल, नारियल और चुनरी अर्पित करना विशेष फलदायी होता है। भक्त “या देवी सर्वभूतेषु तुष्टि रूपेण संस्थिता…” मंत्र का जाप कर माता की आराधना करते हैं।
दान और पूजा का विशेष महत्व
इस दिन विशेष रूप से अन्न और सब्जियों का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा के आशीर्वाद से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
देवी के इस स्वरूप में तृप्ति और तुष्टि दोनों का वास माना गया है।
पौराणिक मान्यताएं और मंदिर की विशेषता
धार्मिक कथाओं के अनुसार, मां कूष्मांडा ने शाकंभरी और शताक्षी रूप धारण कर धरती को हरियाली और जीवन प्रदान किया तथा असुरों का संहार किया। यह भी मान्यता है कि शुंभ-निशुंभ के वध के पश्चात मां दुर्गा ने इसी स्थल पर विश्राम किया था।
इस मंदिर की एक अनूठी विशेषता यह है कि यहां देवी की प्रतिमा के स्थान पर मुखौटे और चरण पादुकाओं की पूजा की जाती है। साथ ही मंदिर में यांत्रिक पूजा पद्धति अपनाई जाती है, जिसका स्थापत्य बीसा यंत्र (बीस कोणीय संरचना) पर आधारित है।
भक्ति में डूबा काशी, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा दर्शन को सुचारु रूप से संचालित किया जा रहा है।