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नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर फटा, 160 फी प्रलयकारी बाढ़ से तबाही

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कुलदीप बरनवाल की रिपोर्ट काठमांडू / नई दिल्ली

 

नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त 2026 की सुबह आई भीषण फ्लैश फ्लड ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचा दी है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 1300 से 1500 से अधिक लोग लापता हैं। लापता लोगों में सैकड़ों विदेशी नागरिक शामिल हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय तीर्थयात्री और पर्यटक भी हैं।

 

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण USGS और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने पुष्टि की है कि यह आपदा भूकंप से नहीं, बल्कि ग्लेशियर के ढहने से हुई है। USGS के अनुसार 26 अगस्त को सुबह 8:37 बजे दर्ज हुई 5.2 तीव्रता की भूकंपीय गतिविधि वास्तव में ग्लेशियर के टूटने और मलबा प्रवाह से उत्पन्न ऊर्जा थी। 

कैसे आई तबाही

 

तिब्बती क्षेत्र में ल्हेंदे नदी के ऊपरी हिस्से में लगभग 5200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का निचला हिस्सा टूटकर करीब 1200 मीटर नीचे घाटी में गिरा। बर्फ, चट्टान और मलबे ने नदी का रास्ता रोक दिया और फिर अचानक अस्थायी बांध टूटने से भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में पानी और मलबे की ऊंची दीवार दौड़ पड़ी। सैटेलाइट तस्वीरों में पहले हरी-भरी घाटी अब भूरे मलबे से ढकी दिख रही है। . केदारनाथ से भी भयावह मंजर                      प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह मंजर 2013 की केदारनाथ त्रासदी से भी भयावह है

इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह – बाढ़ में कई कंक्रीट पुल, झूला पुल और बेत्रावती-रसुवागढ़ी हाईवे का बड़ा हिस्सा बह गया है। घर, सड़कें और जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं।गांव-बाजार खत्मरसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों के कई रिहायशी इलाके, होटल और बाजार मलबे में तब्दील हो गए हैं। बिजली आपूर्ति ठप है और पूरा इलाका ब्लैकआउट में है

 

आंकड़े अभी बदल रहे हैं – रॉयटर्स और CNA के मुताबिक अब तक 157 से 165 शव बरामद हुए हैं, जबकि दोनों देशों में मिलाकर लगभग 1500 लोग लापता हैं, जिनमें करीब 700 से अधिक विदेशी हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार अकेले नेपाल में 823 लोग संपर्क से बाहर हैं, जिनमें सैकड़ों पर्यटक शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों में लापता भारतीयों की संख्या 133 से 177 बताई जा रही है।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और आपदा एजेंसियां मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रही हैं। पुल और सड़कें टूटने से दुर्गम इलाकों में सिर्फ हेलीकॉप्टर और ड्रोन से पहुंचा जा रहा है। चीन की ओर से ग्यिरोंग पोर्ट पर भी रेस्क्यू के लिए ड्रोन और हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं।

भारत की मदद, यूपी-बिहार में अलर्ट

 

भारत सरकार ने 10 टन से अधिक राहत सामग्री, दवाएं और टेंट नेपाल भेजे हैं। भोटेकोशी और त्रिशूली का पानी आगे गंडक और नारायणी में मिलता है, इसलिए बिहार में करीब 5000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और यूपी-बिहार के सीमावर्ती जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

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