सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानिया। तहसील प्रशासन और बार एसोसिएशन के बीच उपजा विवाद अब आर-पार की जंग में तब्दील होता नजर आ रहा है। अपनी मांगों को लेकर अड़े अधिवक्ताओं का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुक्रवार को सातवें दिन भी जारी रहा। इस दौरान जुलूस के माध्यम से पूरे तहसील गलियारे का भ्रमण करते विरोध जताया। इस दौरान अधिवक्ता कमलकांत राय ने कहा कि तहसील परिसर में प्रशासनिक हठधर्मिता और भ्रष्टाचार के विरुद्ध अधिवक्ताओं का आक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जिसके चलते तहसील का न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ा है। धरने को संबोधित करते हुए। उन्होंने प्रशासन पर उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। अधिवक्ताओं का कहना है कि 30 मार्च को बार-बेंच की बैठक में जो 19 सूत्रीय मांगें रखी गई थीं। उन पर प्रशासन ने अब तक न तो कोई ठोस कार्रवाई की है। और न ही कोई आधिकारिक जवाब दिया है। विरोध का मुख्य कारण उपजिलाधिकारी द्वारा अधिवक्ताओं के साथ किया गया कथित अभद्र व्यवहार और तहसील कार्यालयों में बाहरी (प्राइवेट) व्यक्तियों का हस्तक्षेप है। अधिवक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक शासन की मंशा के विरुद्ध कार्य कर रहे प्राइवेट कर्मियों को बाहर नहीं निकाला जाता और तहसीलदार द्वारा नियम विरुद्ध पारित किए गए आदेशों को निरस्त नहीं किया जाता, तब तक यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा। बार एसोसिएशन के नेतृत्व में जुटे अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका यह संघर्ष केवल वकील समुदाय तक सीमित नहीं है। बल्कि यह तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार से त्रस्त उन हजारों वादकारियों की आवाज है जो न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जयप्रकाश राम और सचिव मुनेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि आंदोलन को और धार दी जाएगी। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी कि जब तक उनकी सात सूत्रीय संशोधित मांगों पर लिखित सहमति नहीं बनती, वे पीछे नहीं हटेंगे। प्रदर्शन स्थल पर अध्यक्ष जयप्रकाश राम, सचिव मुनेश सिंह कुशवाहा, पूर्व अध्यक्ष अशोक यादव, पूर्व मंत्री अमरनाथ राम,कमलकांत राय, पंकज तिवारी, अरविंद राय,रामरतन जायसवाल, नरेंद्र राय,संजय दुबे, शशि भूषण राय, मेराज हसन, फैसल होदा, बृजेश कुशवाहा बृजेश ओझा, बब्लू यादव,सोहन यादव,घनश्याम कुशवाहा, संजय यादव, रमेश यादव , अरुण कुमार ,उदय नारायण सिंह, प्रवीण राय, मिथिलेश सिंह, दिग्विजय नाथ तिवारी, राजेश गुप्ता, सुनील कुमार, रवि प्रकाश, मकरध्वज, आजाद खान, बृजेश सिंह आदि कई अधिवक्ता शामिल रहे हैं। तहसील में जारी इस खींचतान से दूर-दराज से आने वाले फरियादियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन फिलहाल समाधान की कोई सूरत नजर नहीं आ रही है।