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बिजली निजीकरण के खिलाफ 390वें दिनआंदोलन जारीसंघर्ष समिति ने संविदाकर्मियों की छंटनी रोकने मांग की*

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पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों का आंदोलन लगातार 390वें दिन भी जारी रहा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले बनारस के बिजलीकर्मियों ने निजीकरण के खिलाफ विरोध दर्ज कराते हुए ऊर्जा प्रबंधन पर मानक के विपरीत संविदाकर्मियों की छंटनी बंद करने की मांग की।

आंदोलनरत कर्मचारियों ने अधीक्षण अभियंता मंडल प्रथम एवं अधिशासी अभियंता परीक्षण खंड प्रथम से मुलाकात कर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। संघर्ष समिति ने कहा कि एक ओर राज्य सरकार रोजगार बढ़ाने के लिए रोजगार मेलों का आयोजन कर रही है, वहीं दूसरी ओर माननीय प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अल्पवेतनभोगी संविदाकर्मी बेरोजगार हो रहे हैं, जिससे वे गलत कदम उठाने को मजबूर हो सकते हैं।

संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के निर्णय को निरस्त किया जाए तथा प्रदेश में पिछले 16 वर्षों से चल रहे आगरा फ्रेंचाइजी मॉडल की गहन समीक्षा कराई जाए। समिति का दावा है कि आगरा फ्रेंचाइजी के चलते अब तक पावर कॉरपोरेशन को लगभग 30 अरब रुपये का घाटा हो चुका है।

संघर्ष समिति ने बताया कि वर्ष 2024-25 में पावर कॉरपोरेशन ने आगरा में टोरेंट पावर कंपनी को करीब 2500 मिलियन यूनिट बिजली की आपूर्ति की। यह बिजली 5.65 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदी गई, जबकि टोरेंट पावर को मात्र 4.29 रुपये प्रति यूनिट की दर से बेची गई। इससे प्रति यूनिट 1.36 रुपये का नुकसान हुआ और केवल वर्ष 2024-25 में ही लगभग 340 करोड़ रुपये का घाटा पावर कॉरपोरेशन को उठाना पड़ा। चालू वित्तीय वर्ष में भी करीब 300 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।

समिति के अनुसार 1 अप्रैल 2010 से 31 मार्च 2024 तक महंगी बिजली खरीदकर सस्ती दरों पर देने के कारण पावर कॉरपोरेशन को लगभग 2434 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। वर्ष 2024-25 और चालू वित्तीय वर्ष के नुकसान को जोड़ने पर यह आंकड़ा 3000 करोड़ रुपये से अधिक हो जाता है। इसके अलावा टोरेंट पावर कंपनी पर पावर कॉरपोरेशन का करीब 2200 करोड़ रुपये का राजस्व बकाया भी लंबित है।

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि निजीकरण की जल्दबाजी में प्रबंधन आगरा फ्रेंचाइजी के वास्तविक परिणामों पर चुप्पी साधे हुए है और घाटे के गलत आंकड़े पेश कर निजीकरण की वकालत कर रहा है। समिति ने मांग की कि नए निजीकरण प्रयोग से पहले आगरा और ग्रेटर नोएडा में निजी कंपनियों के प्रदर्शन की समीक्षा की जाए और यदि प्रयोग विफल पाया जाए तो करार रद्द किए जाएं।

प्रतिनिधिमंडल में ओ.पी. सिंह, जिउतलाल, अंकुर पांडेय, रमाकांत, बंशीलाल, अरुण कौल, पंकज यादव सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। नवीन प्रकाश सिह रिपोर्ट वाराणसी

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