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भट्ठों से जलवायु तक: वाराणसी में ईंट भट्ठा मजदूरों के अनुभवों को जलवायु संवाद के केंद्र में लाने की पहल

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कृष्ण गोपाल की रिपोर्ट

वाराणसी, 29 मई 2026 — चंबल मीडिया द्वारा बुनियाद पहल के तहत एक कार्यक्रम “तपते भट्ठे, बदलता मौसम: जमीनी कहानियाँ और जलवायु संवाद” का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ईंट भट्ठा समुदायों के जीवन, संघर्ष और अनुभवों को जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चर्चाओं के केंद्र में लाना है।

संस्थाओं के बारे में: चंबल मीडिया, खबर लहरिया का मातृ संगठन एक ग्रामीण मीडिया संगठन है, जो ज़मीनी पत्रकारिता, डिजिटल समावेशन और समुदाय आधारित कहानी कहने को मजबूत करने की दिशा में काम करता है। संगठन विशेष रूप से महिलाओं और हाशिये पर मौजूद समुदायों के साथ मिलकर प्रशिक्षण, रिपोर्टिंग और संवाद की प्रक्रियाओं पर काम करता है।

यह कार्यक्रम बुनियाद पहल के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। यह पहल उत्तर प्रदेश के ईंट भट्ठा मजदूरों और उनके परिवारों के जीवन एवं कामकाजी परिस्थितियों को बेहतर बनाने के लिए समुदायों, सामाजिक संगठनों, शोधकर्ताओं और मीडिया के साथ मिलकर काम करती है।

ऐसी पहल की ज़रूरत क्यों?: जलवायु परिवर्तन पर अक्सर नीतियों, प्रदूषण और बड़े वैश्विक लक्ष्यों के संदर्भ में बात होती है। लेकिन इसका सबसे गहरा असर उन समुदायों पर पड़ रहा है जो खुले और कठिन श्रम वाले कामों से जुड़े हैं, जैसे ईंट भट्ठा मजदूर। बढ़ती गर्मी, अनपेक्षित बारिश, लंबे समय तक गर्म वातावरण में काम, बदलता मौसम, पलायन, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और सामाजिक सुरक्षा का अभाव मजदूरों और उनके परिवारों के जीवन को लगातार प्रभावित कर रहे हैं। इसके बावजूद, इन अनुभवों को मुख्यधारा की जलवायु रिपोर्टिंग और सार्वजनिक चर्चाओं में बहुत कम जगह मिलती है. बुनियाद पहल इसी आवश्यकता से शुरू हुई, ताकि ईंट भट्ठा समुदायों के अनुभवों, श्रम अधिकारों, जलवायु न्याय, स्वास्थ्य और सम्मानजनक कामकाजी परिस्थितियों पर गंभीर संवाद हो सके।

बुनियाद पहल के प्रमुख प्रयास: पिछले एक वर्ष में इस पहल के तहत समुदायों, पत्रकारों, शोधकर्ताओं और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर ईंट भट्ठा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को समझने और सामने लाने का काम किया गया है। इसी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है चार्टर ऑफ डिमांड्स, जिसे इस कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा। यह चार्टर उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों के मजदूरों और समुदायों की मांगों और अनुभवों पर आधारित है।

चार्टर में मुख्य रूप से इन मुद्दों को शामिल किया गया है: सुरक्षित और बेहतर कामकाजी परिस्थितियाँ,

श्रम अधिकारों का प्रभावी पालन, स्वास्थ्य और शिक्षा तक पहुँच,

प्रवासी मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा,

पारदर्शी और सरल लाइसेंस व्यवस्था,

और पर्यावरण के अनुकूल एवं टिकाऊ तकनीकों को बढ़ावा।

यह पहल जलवायु नीतियों और विकास से जुड़ी चर्चाओं में मजदूरों के सम्मान, अधिकारों और अनुभवों को शामिल करने की ज़रूरत पर भी ज़ोर देती है।

कहानी कहने और नैरेटिव बिल्डिंग का काम: इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा समुदाय आधारित कहानी कहने और मीडिया प्रशिक्षण पर केंद्रित है। उड़ान फेलोशिप के माध्यम से 15 ईंट भट्ठा और अन्य हाशिये के समुदायों के युवाओं को मोबाइल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग का प्रशिक्षण चंबल अकादमी द्वारा 2 वर्षों में 2 चरणों में दिया गया है कानपुर देहात में। उनकी रिपोर्टें जलवायु परिवर्तन को किसी दूर की या अमूर्त समस्या की तरह नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के जीवन से जुड़े अनुभव के रूप में सामने लाती हैं — जिसमें गर्मी, रोज़गार, पलायन, जाति, जेंडर और जीवन संघर्ष by शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान क्लाइमेट विज़ुअल मैप भी प्रस्तुत किया जाएगा। यह एक उभरता हुआ स्टोरीटेलिंग प्रोजेक्ट है, जो समुदायों की यादों, अनुभवों और पर्यावरण में हो रहे बदलावों की समझ को दर्ज करता है। ये प्रयास जलवायु से जुड़ी मुख्यधारा की कहानियों को चुनौती देते हुए समुदायों के अनुभवों को महत्वपूर्ण ज्ञान के रूप में सामने लाने का प्रयास करते हैं।

राउंडटेबल के बारे में: कार्यक्रम के दिन एक राउंडटेबल चर्चा आयोजित की जाएगी, जिसमें पत्रकार, जलवायु विशेषज्ञ, शोधकर्ता, फेलोज़, ईंट भट्ठा मजदूर, समुदाय प्रतिनिधि और सहयोगी संगठन शामिल होंगे। चर्चा के प्रमुख विषयों में श्रम परिस्थितियाँ, पलायन, जलवायु संकट, आर्थिक स्थिरता, तथा जेंडर और जाति से जुड़े मुद्दे शामिल होंगे। संवाद, फिल्म स्क्रीनिंग, कहानी साझा करने और सहभागी चर्चाओं के माध्यम से यह कार्यक्रम समुदायों, मीडिया और नीति निर्माताओं के बीच बेहतर संवाद बनाने की कोशिश करेगा। इस पूरे आयोजन के केंद्र में एक महत्वपूर्ण सवाल है — जलवायु परिवर्तन की कहानियाँ कौन बता रहा है, और किनकी आवाज़ें अब भी पीछे छूट रही हैं? जलवायु संकट के बढ़ते प्रभावों के बीच यह कार्यक्रम उन समुदायों के अनुभवों को सामने लाने की दिशा में एक प्रयास है, जो इस बदलाव को सबसे पहले और सबसे गहराई से महसूस कर रहे हैं।

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