कार्यालय प्रतिनिधि की रिपोर्ट श्री अग्रसेन कन्या पी० जी० कॉलेज, वाराणसी भारत में नौतपा गर्मियों का वह समय माना जाता है, जब सूर्य की तपिश अपने चरम पर होती है। लगातार लगभग नौ दिनों तक पड़ने वाली भीषण गर्मी, तेज धूप और लू क प्रभाव जनजीवन को काफी प्रभावित करता है। यह समय तब प्रारम्भ होता है, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है। वर्ष 2026 में नौतपा 25 मई से 2 जून तक माना जा रहा है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो इस समय सूर्य की किरणें पृथ्वी पर लगभग सीधी पड़ती हैं, जिससे तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है। दिन बड़े और रातें छोटी होने के कारण धरती अधिक गर्म होती है तथा वातावरण में नमी कम होने से लू चलने लगती है।
ऐसे समय में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सही आहार व्यवस्था अत्यंत आवश्यक हो जाती है। नौतपा के दौरान शरीर में पानी की कमी, थकान, चक्कर आना, कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं सामान्य रूप से देखने को मिलती हैं। इसलिए केवल पानी पीना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि शरीर को आवश्यक खनिज लवण, ऊर्जा और पोषक तत्व भी मिलने चाहिए।
गर्मियों में ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिनमें पानी की मात्रा अधिक हो। तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, संतरा, मौसमी, अंगूर तथा नारियल पानी शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ पानी की कमी को भी पूरा करते हैं। विशेष रूप से तरबूज गर्मियों का सबसे उपयोगी फल माना जाता है। इसमें लगभग 92 प्रतिशत पानी होता है, जो शरीर को हाइड्रेट बनाए रखता है और लू से बचाने में सहायक होता है। इसके अलावा इसमें विटामिन ‘ए’, ‘सी’, बी-6 तथा पोटैशियम पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं।
तरबूज में लाइकोपीन और सिट्रूलिन जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो हृदय को स्वस्थ रखने तथा रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है और प्राकृतिक शर्करा पाई जाती है, इसलिए मधुमेह एवं मोटापे से ग्रसित लोग भी सीमित मात्रा में इसका सेवन कर सकते हैं।
नौतपा के समय थोड़ी-थोड़ी देर पर पानी पीते रहना चाहिए। इसके साथ बेल का शरबत, नींबू पानी, सत्तू का घोल, कच्ची लस्सी, नारियल पानी, फालसे का शरबत तथा गन्ने का रस शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं। भोजन में पतली मूंग या लाल मसूर की दाल तथा मौसमी सब्जियां जैसे लौकी, टिंडा, तोरई और परवल को शामिल करना लाभकारी होता है। भोजन हल्का, ताजा और सुपाच्य होना चाहिए ताकि पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
इसके विपरीत इस मौसम में बहुत तला-भुना और मसालेदार भोजन से बचना चाहिए। समोसे, छोले-भटूरे, चाउमीन, बर्गर, पिज्जा, चाट-पकौड़े, गोलगप्पे तथा पूड़ी-कचौड़ी जैसे बाहर के खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अधिक चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन भी शरीर में पानी की कमी बढ़ाता है। लंबे समय तक खाली पेट रहना भी उचित नहीं है।
अतः नौतपा के दौरान संतुलित एवं पौष्टिक आहार अपनाकर, पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर तथा हल्का भोजन करके हम स्वयं को स्वस्थ रख सकते हैं। सही आहार व्यवस्था ही इस भीषण गर्मी से बचाव का सबसे सरल और प्रभावी उपाय है।