सुकन्या सिंह की रिपोर्टवाराणसी। बढ़ती गर्मी और उमस के बीच काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. ओम शंकर ने लोगों, विशेषकर हृदय रोगियों, बच्चों और बुजुर्गों को स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी का दुष्प्रभाव सबसे अधिक बच्चों और बुजुर्गों पर देखने को मिलता है, क्योंकि इन दोनों वर्गों में शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। यही कारण है कि गर्मी में लू और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं।
डॉ. ओम शंकर ने बताया कि बच्चों को समय-समय पर पर्याप्त मात्रा में दूध और तरल पदार्थ दिए जाने चाहिए। वहीं बुजुर्गों के खान-पान, सुस्ती, कमजोरी और व्यवहार में बदलाव पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। यदि कोई बुजुर्ग अचानक सुस्त हो जाए, खाने-पीने में कमी आ जाए या अत्यधिक थकान महसूस करे, तो यह लू लगने का संकेत हो सकता है। ऐसे में उन्हें तुरंत पौष्टिक आहार, पर्याप्त देखभाल और चिकित्सकीय परामर्श दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सामान्य लोगों को गर्मी में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। हालांकि, हृदय रोगियों, विशेषकर हार्ट फेल्योर के मरीजों तथा किडनी रोग से पीड़ित लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के अधिक पानी नहीं पीना चाहिए। ऐसे मरीजों में अधिक पानी लेने से सांस फूलने और अन्य जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
डॉ. ओम शंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि लू केवल बाहर निकलने से ही नहीं लगती, बल्कि घर के भीतर भी हो सकती है। यदि तापमान अधिक हो, पंखा चल रहा हो, लेकिन शरीर को पर्याप्त पानी न मिले, तो व्यक्ति घर में बैठे-बैठे भी हीट स्ट्रोक या लू का शिकार हो सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि गर्मी के मौसम में पानी, पोषण और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। यदि चक्कर, कमजोरी, तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ या किसी प्रकार की असामान्य समस्या महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।