वाराणसी प्रज्ञा मिश्रा की रिपोर्ट । एक बात तो स्पष्ट है कि युवा चाहे तो कुछ भी संभव है। बात यहां CJP की भी नहीं है, बल्कि छात्रों के भविष्य की है। उनकी दिन-रात की मेहनत और उम्मीदों की है, जिसे पेपर लीक करके तार-तार कर दिया जाता है। उनके सपनों और उत्साह को तोड़ दिया जाता है।माना कि हमारा देश बदल रहा है, देश की नीतियां भी बदल रही हैं। मगर युवाओं का जो आक्रोश है उसे किसी भी तरह दबाना घातक है। जैसा कि हम सबने देखा है, ऐसे में जेन जी को हल्के में लेना ठीक नहीं हैआज शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से बात खत्म नहीं होती है। बल्कि और भी ऐसे मुद्दे हैं जिनके कारण युवा, छात्र-छात्राएं पीड़ित हैं। चाहे वह आरक्षण हो या कुछ अन्य। जो सैलाब प्रोटेस्ट के द्वारा देखने को मिला है उससे साफ जाहिर होता है कि आज की युवा पीढ़ी तुरंत परिणाम चाहती है, न कि चोंचलेबाजी। ये जो जीत है, ये CJP की नहीं बल्कि युवा छात्रों एवं छात्राओं की है, जो कि देशहित में है।इस प्रदर्शन में सभी विपक्षी पार्टियों ने अपनी-अपनी रोटियां सेंकीं, क्योंकि ये हमेशा ऐसे मौके की ताक में रहते हैं। ना मौका मिलता, ना ही प्रदर्शन की आग में घी डालने का लोगों को मौका मिलता। खैर, सरकार की सूझ-बूझ और देशहित में लिया गया फैसला फिलहाल युवाओं के अंदर जल रहे आग को ठंडा करने में सहायक सिद्ध हुआ ।