जमानिया जमानियां। यौमे आशूरा (10 मुहर्रम) के मौके पर कर्बला के शहीदों और हजरत इमाम हुसैन की शहादत का जिक्र करते हुए। मौलाना तनवीर रजा के बयान ने महफिल में शामिल मुस्लिम लोगों को भावुक कर दिया। मंगलवार को कानूनगो मोहल्ला में आयोजित मजलिस में तकरीर करते हुए। बताया कि करबला के भूखे-प्यासे शहीदों के सब्र व इंसाफ के पैगाम को बयां किया गया। जिसे दास्तान सुनकर अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि यौमे आशूरा और कर्बला का संदेशइमाम हुसैन की कुर्बानी हक, सच और इंसानियत के लिए हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों का बलिदान दी। मुहर्रम के इन दिनों में कर्बला के दर्दनाक वाकया और अहले बैत के सब्र को याद किया गया। लोगों की आंखें नम हो गई। रजा ने कर्बला के वाक्या और हालात का जिक्र करने पर महफिल में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गई। मौलाना तनवीर रजा ने वाक्या का बयान फरमाते हुए। कहा कि यौमे आशूरा (मोहर्रम की 10 तारीख) के मौके पर कर्बला के शहीदों और हजरत इमाम हुसैन के 1400 साल पहले दिए गए महान बलिदान व सब्र के वाक्या को याद करते हुए। और बयान को सुनकर अकीदतमंदों की आंखें नम हो गई। इस पावन अवसर पर मुल्क के हर एक कोने में मुस्लिम भाइयों ने आयोजित मजलिसों में कर्बला की प्यास, इंसानियत और हक की रक्षा के वाकया का जिक्र करते है। शाही जामा मस्जिद के सेकेट्री मौलाना तनवीर रजा ने
यौमे आशूरा (10 मुहर्रम) के मौके पर कर्बला के शहीदों और हजरत इमाम हुसैन की शहादत का जिक्र किया। जिसे सुनकर अकीदतमंदों की आंखें नम हुई। ऐसे बयानों में पैगंबर साहब के घरवाले की कुर्बानियों और सब्र व इंसाफ के पैगाम को बहुत ही दर्दनाक और असरदार तरीके से रखा गया। उन्होंने यौमे आशूरा और कर्बला का पैगाम इमाम हुसैन की शहादत को अपने तकरीर में पेश किया। रजा ने कहा कि कर्बला के मैदान में तीन दिन के भूखे-प्यासे इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत हुई। उन्होंने कहा कि सब्र और न्याय जुल्म के खिलाफ डटे रहने और दीन की (सुरक्षा) के लिए दी गई महान कुर्बानी है। मजलिस या बयान के दौरान कर्बला के दर्दनाक वाकया को सुनकर सुनने मुस्लिम भाइयों की आंखें नम हो गई। और माहौल गमगीन हो गया। है। मौलाना तनवीर रजा ने यौमे आशूरा (10 मुहर्रम) के मौके पर कर्बला के शहीदों के सब्र, त्याग और इमाम हुसैन की शहादत का दर्दनाक और हिला देने वाला बयान फरमाया। उनके इस रोंगटे खड़े कर देने वाले और गमगीन बयान को सुनकर मजलिस में मौजूद तमाम अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं। और लोगों के दिलों में कर्बला की याद ताजा हो गई।यौमे आशूरा और कर्बला का पैगाम इंसानियत की कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने तीन दिन के भूखे-प्यासे रहकर भी जालिम के सामने सिर नहीं झुकाया। मौलाना ने बयान में बताया कि इमाम हुसैन की शहादत जुल्म और असत्य के खिलाफ हमेशा हक और इंसाफ की जीत का प्रतीक है। अकीदतमंदों ने बयान के दौरान कर्बला के भूखे-प्यासे बच्चों और शहीदों के दर्द को बयां करते हुए सुनने वालों की आंखें छलक आईं।