सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानिया जमानियां। माह-ए-रमजान में रोजेदार कसरत के साथ कुरान की तिलावत कर अल्लाह की इबादत में मशगूल हैं। जो आत्मसंयम, धैर्य और रूहानी सुकून का प्रतीक है। यह पाक महीना रहमत और बरकत का है, जिसमें कुरान पढ़ना और उसे समझना, नफ्स पर नियंत्रण, भाईचारा और नेक आमाल को बढ़ावा देता है। इस दौरान विशेष रूपमाह-ए-रमजान में रोजेदार कसरत के साथ कुरान की तिलावत कर अल्लाह की इबादत में मशगूल हैं।
से तरावीह और तहज्जुद की नमाजों में भी कुरान को सुनाया और याद किया जाता। रोजेदार नजरून निशा, मोहम्मद नेसार अहमद ने बताया कि रमजान में कुरान के तिलावत का महत्व बताया और कहा कि रूहानी और रूहानी सुकून है। कुरान की तिलावत रूह को सुकून देती है और आंतरिक शांति प्रदान करती है। रमजान में कुरान पढ़ने से अल्लाह की रहमत और माफ़ी के दरवाजे खुलते हैं। उन्होंने कहा कि कुरान पढ़ने से अल्लाह की शिक्षाओं को समझने और उन्हें जीवन में उतारने में मदद मिलती है।
यह पवित्र महीना नेक आमाल और पुण्य कमाने का अच्छा रास्ता (अवसर) है। दोनों रोजेदारों ने बताया कि कुरान का सुनाना (पाठ) मुसलमानों को एक साथ लाता है और भाईचारे को बढ़ावा देता है। नजरून निशा, मोहम्मद नेसार अहमद ने कहा कि रोज़ाना कुरान को पढ़ना (पाठ) करना चाहिए। और कुरान को समझकर पढ़ना चाहिए। ताकि उसके अर्थ और मार्गदर्शन को समझ में आ सके। रमजान में कुरान पढ़ने के लिए विशेष समय निकालना चाहिए। झुंड (समूह) में कुरान पढ़ने से प्रेरणा मिलती है।
रमजान का महीना कुरान के साथ खूब तिलावत करना रूहानी सफ़र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।