वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र गुप्ता की रिपोर्ट
वाराणसी — चौकाघाट स्थित विश्वकर्मा सभा वाराणसी में रविवार को विश्वकर्मा सभा की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें विश्वकर्मा समाज के जनपद के समस्त पदाधिकारी एवं सदस्यों ने बढ़कर कर हिस्सा लिया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जो भी राजनीतिक दल विश्वकर्मा समाज के सम्मान, अधिकार और राजनीतिक भागीदारी की बात करेगा, समाज उसी को समर्थन करेगा। उक्त बातें विश्वकर्मा समाज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सोमनाथ विश्वकर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विश्वकर्मा समाज की जनसंख्या 5% से अधिक है और पूर्वांचल की 25 से 30 विधानसभा सीटों पर समाज का निर्णायक प्रभाव है। इसके बावजूद भी राजनीतिक दलों द्वारा समाज को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। विश्वकर्मा समाज सदैव राष्ट्र निर्माण और सामाजिक विकास में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। लेकिन राजनीतिक स्तर पर उसकी लगातार उपेक्षा की गयी। सभा के अध्यक्ष अमरनाथ विश्वकर्मा ने कहा कि विश्वकर्मा समाज केवल एक जाति नहीं, बल्कि सृजन निर्माण और विकास का प्रतीक है। भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का प्रथम अभियंता एवं शिल्पकार माना जाता है। समाज ने युगों युगों से देश की सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। लेकिन उसे उसके योगदान और जनसंख्या के अनुरूप राजनीतिक भागीदारी नहीं मिली। मंत्री अनिल शर्मा और कोषाध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा ने संयुक्त रूप से कहा कि प्रदेश में समाज का पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि दशकों से चली आ रही उपेक्षा अब स्वीकार नहीं की जाएगी और समाज लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेगा। बैठक में मंत्री अनिल शर्मा, कोषाध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा,अरविंद विश्वकर्मा, डा. सुनील विश्वकर्मा, शिव शंकर शर्मा एडवोकेट ,जुगल किशोर, चंद्रकला विश्वकर्मा, रीना विश्वकर्मा, धर्मेंद्र शर्मा, कृष्ण कुमार विश्वकर्मा, जय राम विश्वकर्मा, संतोष विश्वकर्मा, दिलीप विश्वकर्मा सहित काफी लोग उपस्थित रहे।