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राजनीति की तपिश के बीच मानवीय संवेदनाओं की यह शीतल बयार ही भारतीय लोकतंत्र की असली शक्ति है।

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दिव्य प्रकाश गुप्ता की रिपोर्ट                         वाराणसी राजनीति की तपिश के बीच मानवीय संवेदनाओं की यह शीतल बयार ही भारतीय लोकतंत्र की असली शक्ति है *सर गंगा राम अस्पताल से आई यह तस्वीर केवल दो नेताओं की मुलाकात नहीं, बल्कि उस ‘भारतीय संस्कृति’ का प्रतिबिंब है जहाँ वैचारिक मतभेद कभी व्यक्तिगत मर्यादाओं पर हावी नहीं होते।*

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का श्रीमती सोनिया गांधी जी के स्वास्थ्य की जानकारी लेने पहुंचना यह संदेश देता है कि सत्ता और विरोध की सीमाओं से परे हम पहले एक समाज हैं। नीतियों और सिद्धांतों की लड़ाई अपनी जगह है, लेकिन संकट के समय एक-दूसरे के साथ खड़ा होना ही वह उच्च आदर्श है जिसे मोदी जी ने सदैव अपने आचरण से सिद्ध किया है।

लोकतंत्र में *’शत्रुता’* के लिए कोई स्थान नहीं है, यहाँ केवल ‘प्रतिद्वंद्विता’ होती है। प्रधानमंत्री जी का यह सहज कदम उन लोगों के लिए एक सबक है जो राजनीति को केवल नफरत के चश्मे से देखते हैं। स्वस्थ परंपराओं का यह निर्वहन ही हमारे संसदीय लोकतंत्र को विश्व में श्रेष्ठ बनाता है।

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