Follow us on

लिंग, रंग, वर्ण, जाति से अलग होनी चाहिए शोध की दिशा : प्रो अनुराग कुमार 

Share this post:

साक्षी सिंह की रिपोर्ट 

वाराणसी। महामना मदनमोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा आयोजित एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर), शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित ‘सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शोधार्थियों के लिए शोध पद्धति और अकादमिक लेखन’ विषयक दस दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम के तीसरे दिन बुधवार को शोध प्रक्रिया, शोध गैप, शोध प्रस्ताव लेखन, साहित्य सर्वेक्षण, शोध अभिकल्प, निदर्शन आदि विषयों पर व्याख्यान हुआ। डॉ. भगवान दास केन्द्रीय पुस्तकालय के समिति कक्ष में आयोजित कार्यशाला के प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता हिन्दी विभाग, काशी विद्यापीठ के प्रो. अनुराग कुमार ने कहा कि वैज्ञानिक चेतना ही शोध का प्रस्थान बिन्दु है। शोध स्वयं की धारणा से मुक्त होना चाहिए। लिंग, रंग, वर्ण, जातिगत भिन्नता से अलग होकर शोध की दिशा होनी चाहिए। वर्तमान समय मे पी-एच.डी. करने के क्रम में पूर्व से ज्ञान स्त्रोत पर ही निर्भर रह जाते हैं। प्रो. अनुराग ने कहा कि शोधकर्ता में यह साहस होना चाहिए कि वह अज्ञात स्त्रोत की और बढे। शोध के विभिन्न चरणों मे स्थापित सीमाओं को विस्तार दे।दूसरे सत्र में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. राकेश तिवारी ने कहा कि शोध प्रस्ताव शोध के पूर्व की रूपरेखा है। इसका संतुलित व सही चयन ही शोध को आधार देता है। प्रो. तिवारी ने शोध समस्या, शोध प्रविधि, साहित्य सर्वेक्षण, उपकल्पना, तथ्य संकलन व विश्लेषण सहित शोध के विभिन्न चरणों की व्याख्या की तथा इसमें आने वाली समस्या व चुनौतियों को स्पष्ट किया। तीसरे सत्र में उदय प्रताप कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के डॉ. अनुराग उपाध्याय ने ‘रिसर्च डिजाइन ऐंड टूल्स’ विषय पर प्रतिभागियों से चर्चा करते हुए कहा कि अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग शोध उपकरण प्रयोग होते हैं। शोध के विभिन्न प्रकार में शोध के प्रारूप, शोध अभिकल्प का व्यवस्थित प्रयोग ही शोध के लक्ष्य को प्राप्त करने मे सहायक होता है। उन्होंने कहा कि डाटा कलेक्शन, सैंपलिंग में होने वाली त्रुटियों के प्रति सावधानी बरतनी होगी। कार्यशाला के अंतिम सत्र में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के वर्धा समाजकार्य संस्थान क्षेत्रीय केन्द्र प्रयागराज के डॉ. मिथिलेश कुमार तिवारी ने शोध में साहित्य समीक्षा के उद्देश्य व महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने जे स्टोर, रिसर्च गेट, नोटबुक जैसे विभिन्न तकनीकी को स्पष्ट किया। अंत में डॉ. तिवारी ने शोध के विषय के अनुरूप साहित्य समीक्षा के उपयोग पर प्रतिभागियों के प्रश्नों का जवाब भी दिया। स्वागत पाठ्यक्रम निदेशक एवं महामना मदनमोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह, संचालन डॉ. अमित कुमार सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. चन्द्रशील पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के डॉ. जय प्रकाश श्रीवास्तव, अनिरूद्ध पाण्डेय, डॉ. वैष्णवी शुक्ला, अरविंद मिश्र, गुरू प्रकाश सिंह, देवेन्द्र गिरि, गणेश राय, आकाश सिंह, सपना तिवारी, डाली विश्वकर्मा, पुलकित, स्तुति, समर, मनीष, हर्ष आदि उपस्थित रहे।

लेखक के बारे में

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर

मौसम अपडेट

राशिफल

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x
Verified by MonsterInsights