विश्व पर्यावरण दिवस हम कहां मनाएं जब हमारी उपजाऊ कृषि भूमि छीन लोगे तो पेड़-पौधे कहाँ लगाएँगे हरियाली

शिवपूजन कुमार की रिपोर्ट

*वाराणसी* – विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहाँ एक ओर पूरे देश में वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण की औपचारिकताएँ निभाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर वाराणसी के राजातालाब क्षेत्र से एक गंभीर और विचारणीय सवाल खड़ा किया गया है। क्षेत्र के समस्त नागरिकों और किसानों ने मिलकर उपजाऊ कृषि भूमि के लगातार हो रहे अधिग्रहण के खिलाफ शांतिपूर्ण अभियान छेड़ा है। सामाजिक कार्यकर्ता सुबेदार यादव के नेतृत्व में क्षेत्रवासियों ने एक स्वर में सरकार और प्रशासन से अपील की है कि विकास के नाम पर ‘सोना उगलने वाली’ इस मिट्टी का विनाश रोका जाए।जब हमारी उपजाऊ कृषि भूमि ही नहीं रहेगी, तो हम कैसे विश्व पर्यावरण दिवस मनाएँगे? देश को ऑक्सीजन और हरियाली कैसे दिला पाएँगे? साहब! विकास के नाम पर विनाश मत करो। जमीन सिर्फ मिट्टी का टुकड़ा नहीं, हमारा जीवन है!जन-जागरूकता अभियान के दौरान किसानों ने साफ कहा कि कृषि भूमि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश के पर्यावरण का आधार स्तंभ भी है। किसानों का सीधा तर्क है कि यदि खेत ही नहीं बचेंगे, तो पेड़-पौधे कहाँ लगाए जाएँगे? खेतों के नष्ट होने से सीधे तौर पर देश की ऑक्सीजन आपूर्ति और हरियाली प्रभावित होगी, जो कि मानव जीवन के लिए एक बड़ा खतरा है। उपजाऊ कृषि भूमि का गैर-कृषि कार्यों और औद्योगिक विकास के नाम पर अधिग्रहण पूरी तरह से बंद किया जाए। देश का भविष्य कहे जाने वाले किसान और प्रकृति के अस्तित्व को मिटाने वाली नीतियों में तत्काल सुधार हो। विकास की योजनाएँ बंजर या कम उपजाऊ भूमि पर बनाई जाएँ, ताकि पर्यावरण और खेती दोनों का संतुलन बना रहे।समाज सेवी सुबेदार यादव मैं किसान हूँ, देश का भविष्य हूँ”

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