सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां। सरकारी अस्पताल के जिम्मेदार चिकित्सक अपने कार्य के प्रति बेपरवाह हो चुके है। जिसके चलते मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला से रविवार के दिन जानबूझ कर गैर हाजिर रहते है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरूईन की यही हाल रहता है। इस केंद्र पर तभी तक मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला आयोजित किया जाता है। जब सूचना मिलता है। कि जिलाधिकारी निरीक्षण करने पहुंच रहे है। अन्यथा कार्य के प्रति डर नाम की कोई चीज नहीं रहता है। बताया जाता है। कि मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला किसी भी मौसम में आयोजित होना है। मुख्यमंत्री के आदेशानुसार हर रविवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक आयोजित किए जाने का फरमान दी है। हालांकि बदलते मौसम के अनुसार इन मेलों में उसी समय फैलने वाली मौसमी बीमारियों (जैसे- गर्मी में लू और डायरिया, या सर्दी में बुखार और खांसी) के इलाज पर विशेष जोर दिया जाता है। यही हाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जमानियां का है। अमन शांति एकता कमेटी के सरपरस्त नेसार खान वारसी, अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार के तहसील अध्यक्ष इजहार खान, भाजपा व्यापार मंडल के युवा जिला उपाध्यक्ष मुन्ना गुप्ता, वीरेंद्र कुमार, संसार सिंह, शशिकांत जयसवाल, उपेंद्र सिंह सहित आदि लोगों ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पर मरीजों के इलाज के लिए सुविधा होने के बाद भी कार्यरत चिकित्सक मनमानी ढंग से कार्य को अंजाम देते रहते है। उन्होंने कहा कि रविवार के दिन लगने वाली मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला से डाक्टर और स्वास्थ्य कर्मी गायब रहते है। पूछने पर कोई ठोस जवाब नहीं मिलता है। पैथोलॉजी जांच, कार्ड बनवाना होता है। संसार सिंह, शशिकांत जयसवाल ने बताया कि इन मेलों में आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से जुड़े गोल्डन कार्ड (आयुष्मान कार्ड) भी बनाए जाते हैं।लेकिन मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेलों के प्रति चिकित्सकों की लापरवाही एक गंभीर समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरूईन से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पर डॉक्टर अनुपस्थित रहते हैं। इससे मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ रहा है। जिससे मेलों का मुख्य उद्देश्य निष्फल साबित हो रहा है। शासन के निर्देशों के बावजूद एलोपैथिक, आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक डॉक्टर मेलों से हमेशा नदारद रहते हैं।