साक्षी सिंह की रिपोर्ट
वाराणसी/अयोध्या के धार्मिक गलियारों में इन दिनों ‘आशुतोष ब्रह्मचारी’ पर हुए कथित हमले को लेकर चर्चाओं का बाज़ार गर्म है। ट्रेन में हुए इस कथित हमले के बाद जहाँ उनके समर्थक इसे बड़ी साज़िश बता रहे हैं, वहीं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बयानों ने इस पूरी घटना को संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया है।
बाथरूम का रहस्य: क्या खुद को घायल किया!
घटना के समय मौजूद अटेंडेंट के हवाले से जो जानकारी सामने आई है, वह चौंकाने वाली है। शंकराचार्य ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि “अटेंडेंट के अनुसार, आशुतोष बाथरूम जाने तक बिल्कुल ठीक थे, लेकिन वहां से निकलते ही वे लहूलुहान अवस्था में मिले।” यह सवाल उठना लाज़िमी है कि चलती ट्रेन के बंद बाथरूम में अचानक हमलावर कहाँ से आ गए! क्या यह घाव बाहरी हमले का परिणाम हैं या खुद को घायल कर ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने की एक सोची-समझी रणनीति
सुरक्षा के नाम पर ‘पब्लिसिटी स्टंट’!
आलोचकों का मानना है कि यह हमला नहीं, बल्कि एक ‘फेक ड्रामा’ है ताकि!
सरकारी सुरक्षा (Y या Z श्रेणी) प्राप्त की जा सके।
जनता की सहानुभूति बटोर कर अपनी गिरती साख को बचाया जा सके।
‘नकली हिंदू’ होने के आरोपों से ध्यान भटकाया जा सके।
प्रशासन की चुप्पी और बढ़ते सवाल
रेलवे प्रशासन और GRP अभी भी इस मामले की जाँच कर रहे हैं, लेकिन सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच इस तरह की घटना का होना कई अनसुलझे सवाल छोड़ता है। यदि यह हमला वाक़ई हुआ है, तो प्रशासन की सुरक्षा पर धब्बा है, और यदि यह झूठा है, तो यह साधु-संतों की मर्यादा और आस्था के साथ बड़ा खिलवाड़ है।
“यह सिर्फ माहौल बनाने और सुरक्षा प्राप्त करने का एक तरीका हो सकता है। बाथरूम के अंदर कौन हमला कर सकता है? यह पूरी तरह से बनावटी लगता है।” > — शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वत