सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां। नगर कस्बा बाजार स्थित शाही जामा मस्जिद के सेकेट्री मौलाना तनवीर रजा ने शुक्रवार (जूम) के दिन तकरीर पेश करते हुए। कहा कि अल्लाह तआला ने मुसलमानों के लिए दो त्योहार अता किए हैं। एक ईद और दूसरा बकरीद जिसके आने पर मुसलमानों के अंदर खुशी का माहौल पैदा होता है। ईद की खुशी तीस रोजा के बाद अल्लाह ताला अता करता है। और बकरीद में मुसलमान हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत कुर्बानी अल्लाह रब्बुलइज्जत की बारगाह में पेश करके खुशी का इजहार करता है। रसूल सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम से सहाबा केराम ने पूछा कि कुर्बानी क्या है। तो रसूल ने फरमाया तुम्हारे बाप हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है। उन्होंने कहा कि कुछ ही दिनों में बकरीद का त्योहार आने वाला है। इस अवसर पर मुसलमानों को ज्यादा से ज्यादा कुर्बानी करनी चाहिए। कुर्बानी हर मुसलमान पर वाजिब है। जो आकिल बालिग और मुकीम हो और उसकी मिलकियत में साढ़े बावन तोला चांदी या उसकी कीमत का माल हो और उसकी जरूरत असलिया से ज्यादा हो। कुर्बानी के लिए इस माल पर साल गुजारना भी जरूरी नहीं है। कुर्बानी के लिए हम अच्छे जानवर को खरीदें। प्रतिबंधित जानवर की कुर्बानी करने से बचें। छोटे जानवर में एक आदमी के नाम कुर्बानी होती है। और बड़े जानवर (भैंसा) में 7 आदमी के नाम कुर्बानी होती है। कुर्बानी के दिनों में जब हम अपने जानवर की कुर्बानी करें। और आसपास में साफ-सफाई का खास ख्याल रखें, कोई ऐसा काम न करें। जिससे किसी दूसरे को तकलीफ हो।