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हमारा धर्म गोंडी है* कि मांग को लेकर देश की आजादी के पहले हमारे पूर्वज अंग्रेजों से लड़ गए थे

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वशिष्ट कुमार की रिपोर्ट 

*हमारा धर्म गोंडी है* को अखिल भारतीय गोंडवाना गोंड महासभा द्वितीय अधिवेशन सिवनी 1936 एवं नैनपुर (इटका) 1945 के अधिवेशन द्वारा पारित प्रस्ताव के अनुसार सप्तम अधिवेशन 2009 में सर्वसम्मति से प्रस्ताव क्रमांक 15 में पारित किया गया है। तदानुसार छत्तीसगढ़ , मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, तेलंगाना सहित देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित प्रत्येक अधिवेशन में *हमारा धर्म गोंडी है* को दोहराया गया है।

गोंडी धर्म, गोंडी भाषा, गोंडवाना राज्य की मांग को लेकर अलग-अलग संगठनों द्वारा भी समय-समय पर इस बात को उठाते रहे हैं। लेकिन सभी सरकार हमारी जायज मांगों को अनसुनी करती रही है।

लाखों की तादाद में छत्तीसगढ़ के कांकेर में आयोजित राष्ट्रीय महा अधिवेशन में पारित प्रस्ताव अनुसार 2011 की जनगणना में लाखों लोगों ने अन्य कॉलम में गोड़ी धर्म दर्ज कराये थे।

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