कार्यालय प्रतिनिधि की रिपोर्ट
वाराणसी के कंदवा ग्राम में मंगलवार को उस समय तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई जब नगर निगम की टीम ने माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश को दरकिनार करते हुए विवादित भूमि पर बाउंड्री वॉल का निर्माण शुरू करा दिया। इस दौरान स्थानीय निवासियों और पीड़ित पक्ष ने भारी विरोध प्रदर्शन किया।
*क्या है पूरा मामला?*
ग्राम कंदवा (परगना देहात अमानत) निवासी छांगुर और गोपाल पुत्रगण स्व० नन्हकू का अपनी पुश्तैनी भूमि (आराजी नं0-531/3) को लेकर राजस्व विभाग के साथ विवाद चल रहा है। पीड़ित पक्ष का दावा है कि वे जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम के पूर्व से ही इस भूमि पर बागदार भूमिधर के रूप में काबिज हैं और वहां उनका मकान व कुआं स्थित है।
*न्यायिक प्रक्रिया और हाईकोर्ट का हस्तक्षेप*
👉 1. निचली अदालत का आदेश: चकबंदी अधिकारी ने 18 फरवरी 2026 को आदेश पारित कर पीड़ितों की आपत्ति खारिज कर दी थी।
👉 2. SOC व DDC से झटका: इसके विरुद्ध बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी (SOC) और फिर उप-संचालक चकबंदी (DDC) के यहाँ अपील व निगरानी की गई, लेकिन दोनों ही जगहों से स्थगन प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया गया।
👉 3. हाईकोर्ट की राहत: अंततः पीड़ितों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया (Writ-B No. 1959 of 2026)। माननीय न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय ने 11 मई 2026 को आदेश पारित करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि मौके पर यथास्थिति बनाए रखी जाए और कोई भी ध्वस्तीकरण या निर्माण न किया जाए।
*न्यायालय के आदेश की अवमानना का आरोप*
हाईकोर्ट का आदेश आने के ठीक अगले ही दिन, 12 मई 2026 को नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल और अमले के साथ मौके पर पहुँच गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि सहायक नगर आयुक्त शेषनाथ यादव और लेखपाल जितेंद्र यादव की उपस्थिति में उच्च न्यायालय के आदेश को दरकिनार कर बाउंड्री वॉल खड़ी कराने लगें।
*जनता का आक्रोश*
जैसे ही निर्माण कार्य शुरू हुआ, पीड़ित छांगुर और गोपाल के साथ स्थानीय लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए और विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जब देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्थाओं में से एक (हाईकोर्ट) ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है, तो प्रशासनिक अधिकारी किस आधार पर जबरन निर्माण करा रहे हैं?
*हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि 25 मई 2026 को अगली सुनवाई तक कोई बदलाव नहीं होगा, फिर भी अधिकारी तानाशाही पर उतारू हैं।””*_ : *पीड़ित पक्ष*
*अधिकारियों का पक्ष*
मौके पर मौजूद अधिकारियों ने इस विषय पर स्पष्ट टिप्पणी करने से बचते हुए केवल सरकारी कार्य में बाधा न डालने की बात कही। हालांकि,पीड़ित पक्ष का आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी दिखाए जाने के बाद भी नगर आयुक्त शेषनाथ यादव द्वारा हाईकोर्ट के आदेश का व्याख्या करते हुए कहा गया कि इस आदेश में हमको बाउंड्री वॉल करने से नहीं रोका गया है।
अब देखना यह है कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के उल्लंघन के इस मामले में उच्च न्यायालय आगामी 25 मई को क्या कड़ा रुख अख्तियार करता है।