कार्यालय प्रतिनिधि की रिपोर्ट
आज भाजपा मुख्यालय में जो नज़ारा दिखा, उसे देखकर तो मिडिल क्लास के स्कूटर भी खुशी से ‘धुआं’ छोड़ने लगे होंगे! अमरीका ने रूस से तेल खरीदने के लिए भारत को ‘हरी झंडी’ क्या दिखाई, यहाँ तो जश्न का माहौल ऐसा है जैसे 10 सदियों के सारे ओलंपिक गोल्ड मेडल अकेले हमने ही जीत लिए हों!
कूटनीति की ‘भारी’ जीत: वक्ताओं ने इसे भारत की पिछले 1000 सालों की सबसे बड़ी जीत बताया है। (मतलब चोल, मौर्य और मुगलों ने तो जैसे बस टाइमपास किया था, असली काम तो अब हुआ है!)
फूलों की बारिश: मोदीजी का स्वागत इतने फूलों और मालाओं से हुआ कि एक पल के लिए लगा कि पुतिन खुद मास्को से ‘बधाई हो’ का ऑर्डर भेज दिए हैं।
अमरीका की ‘मजबूरी’ या भारत की ‘धूरी’?: लोग कह रहे हैं कि जो बाइडन ने छूट नहीं दी है, बल्कि वो तो बस मोदीजी की मुस्कुराहट देखकर ‘पिघल’ गए!
विपक्ष का हाल: बेचारे विपक्ष वाले अब ये सोच रहे हैं कि वो ‘महँगे पेट्रोल’ पर रोएं या ‘कूटनीतिक जीत’ पर तालियाँ बजाएं। कंफ्यूजन ही कंफ्यूजन है!
नतीजा: अब तो बस इंतज़ार है कि पेट्रोल के दाम 10 सदी पुराने वाले रेट पर पहुँच जाएं (यानी कि आना-दो आना)! क्या बोलते हो पब्लिक!