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जमानियां कस्बा के प्रशांत चौरसिया भारतीय सेना में कैप्टन थे। साथी को बचाने में शहीद, पिता बोले- सिर पत्थर से टकराया

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सलीम मंसूरी की रिपोर्ट 

जमानियां। युवाओं के धड़कन लोकप्रिय नेता अरुण सिंह अपने दर्जन भर से अधिक समर्थकों के साथ कस्बा दुर्गा चौक के रहने वाले 25 साल के भारतीय सेना में कैप्टन शहीद प्रशांत चौरसिया के निवास स्थान पहुंचकर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शहीद कैप्टन प्रशांत चौरसिया जाते जाते एक मिशाल कायम किया। जिनको कभी भुलाया नहीं जा सकता है। बताया जाता है। की प्रशांत चौरसिया देहरादून नदी गिरे अपने साथी को बचाने में जान चली गई। 20 मार्च को प्रैक्टिस के दौरान एक जवान नदी के तेज बहाव में फंस गया था। यह देख कैप्टन प्रशांत चौरसिया नदी में कूद पड़े। उन्होंने साथी को तो बचा लिया, लेकिन खुद तेज बहाव में फंस गए। साथ ही एक पत्थर से टकराकर घायल भी हो गए। जवानों ने उन्हें नदी से बाहर निकालकर आर्मी अस्पताल पहुंचाया। जहां इलाज के दौरान 22 मार्च को उनकी मौत हो गई। बेटे की मौत की खबर सुनकर मां सुमन देवी बेसुध हो गईं। सोमवार को कैप्टन का पार्थिव शरीर देहरादून से वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट लाया गया। फिर वहां से सेना के ट्रक में शव रखकर निवास स्थान जमानियां कस्बा लाया गया। इस दौरान नगर कस्बा बाजार के हिन्दू मुस्लिम सैकड़ों लोग शव यात्रा में शामिल रहे। इसके बाद शाम करीब साढ़े 4 बजे बलुआ घाट पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। छोटे भाई मयंक चौरसिया ने कैप्टन को मुखाग्नि दी। कैप्टन को मुखाग्नि देने से पहले छोटे भाई मयंक ने अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं। बेटे की मौत का पता चलते ही उनकी मां सुमन देवी फूट-फूटकर रोने लगीं। इस दौरान रिश्तेदार उन्हें संभालते रहे। इस दौरान रिश्तेदार उन्हें संभालते रहे। कैप्टन प्रशांत चौरसिया की मौत की खबर मिलते ही परिवार वाले और रिश्तेदार उनके घर पर इकट्‌ठे हो गए। इस दौरान लोग रोते रहे। शहीद कैप्टन प्रशांत चौरसिया को सेना के जवानों ने गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया। सेना के ट्रक में कैप्टन का पार्थिव शरीर घर पहुंचा। ट्रक में सेना के जवान भी मौजूद रहे। शहीद कैप्टन प्रशांत चौरसिया का पार्थिव शरीर पहले जमानिया कस्बा स्थित रामलीला मैदान में रखा गया। वहां बड़ी संख्या में हिन्दू मुस्लिम लोगों ने अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पार्थिव शरीर उनके पैतृक घर ले जाया गया। इस दौरान क्षेत्र की पूर्व विधायक सुनीता सिंह भी पहुंचीं और शहीद कैप्टन को श्रद्धांजलि दी। एसडीएम सुश्री ज्योति चौरसिया, तहसीलदार रामनारायण वर्मा परिजनों से मिलने घर पहुंचे।4 साल पहले प्रशांत का NDA में सिलेक्शन हुआ था। कैप्टन प्रशांत चौरसिया जमानियां कस्बा के रहने वाले थे। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा यहीं के सेंट मैरीज स्कूल से हासिल की थी। 2022 में नेशनल डिफेंस अकादमी (एनडीए) से उनका चयन हुआ था। उनकी बड़ी बहन सलोनी की शादी पिछले महीने ही हुई थी। छोटा भाई मयंक घर पर रहकर पढ़ाई करता है। शहीद कैप्टन प्रशांत के पिता पुरुषोत्तम दास ने बताया कि साथी को बचाने के दौरान बेटे के सिर पर चोट लग गई थी। पिता पुरुषोत्तम चौरसिया ने बताया कि जमानियां क्षेत्राधिकारी ने मुझसे फोन करके पूछा था। कि क्या प्रशांत के बारे में कोई जानकारी मिली है। इसके बाद मैंने बेटे प्रशांत को फोन किया। फोन उसके एक दोस्त ने उठाया। उसने कहा कि आप तुरंत यहां आ जाइए। उसने फ्लाइट के दो टिकट भी भेजे। इसके बाद हम लोग फ्लाइट से सुबह दिल्ली पहुंचे। वहां से देहरादून गए। वहां पहुंचने पर हमें बताया गया कि 20 मार्च को नदी पार करने के दौरान प्रशांत अपने डूबते हुए साथी को बचाने की कोशिश कर रहे थे। तभी तेज बहाव की चपेट में आ गए। इससे उनके सिर में चोट लग गई और उनकी मौत हो गई। जब प्रशांत चौरसिया का नेशनल डिफेंस अकादमी (एनडीए) से सिलेक्शन हुआ था। उनके साथ माता-पिता दिख रहे हैं। वहीं, सूर्या कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेन गुप्ता, जीओसी-इन-सी और सूर्य कमान के सभी रैंकों ने नदी पार करने के अभ्यास के दौरान बलिदान देने वाले कैप्टन प्रशांत कुमार चौरसिया को श्रद्धांजलि अर्पित दी है। कहा कि इस दुख की घड़ी में भारतीय सेना शोक संतप्त परिवार के साथ पूरी तरह से एकजुट है। उनका साहस और कर्तव्यनिष्ठा सेवा की सर्वोच्च परंपराओं का प्रतीक है। यह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उक्त मौके पर गिरधारी सिंह, चंदन तिवारी, भूपेंद्र सिंह, व्यापार मंडल के जिला उपाध्यक्ष मुन्ना गुप्ता, रजनीकांत श्रीवास्तव, कुलेश चौधरी, राजेंद्र गिरी, आदि सहित दर्जन भर से अधिक समर्थक मौजूद रहे।

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