सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां। कैमूर, बिहार के घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ों के बीच स्थित गुप्ता धाम (गुप्तेश्वर नाथ मंदिर) कावरियों के लिए एक अत्यंत पवित्र और लोकप्रिय तीर्थ स्थल है। महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहाँ कावरियों का विशाल जत्था बोलबम के जयकारों के साथ कस्बा बाजार स्थित पक्का बलुआ पक्का घाट गंगा नदी किनारे पहुंचा। जिसके बाद स्नान का सिलसिला देर तक चलता रहा। और शिवलिंग की पूजा के लिए भक्त मुश्किल रास्तों से होते हुए गुजरने के लिए रवाना हुए। गुप्ता धाम यात्रा की कैमूर जिले में करमचट बांध से लगभग 20-25 किमी आगे स्थित है। यह रास्ता घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ों से घिरा हुआ है। भगवान भोलेनाथ का मंदिर एक गुफा के अंदर है। जहाँ पानी रिसता रहता है। यहाँ का माहौल अत्यंत शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक होता है। जिसे देख मन प्रसन्न हो जाता है। शनिवार को कावरियों के जत्थे अपनी यात्रा के लिए कस्बा बाजार स्थित पक्का बलुआ घाट गंगा नदी पहुंचा। और स्नान के बाद गुप्ता धाम के लिए आनंद लेते रवाना हुए। बताया जा रहा है। कि बैसाखी और शिवरात्रि के पावन अवसर पर, शिव भक्त कांवड़ियों के जत्थे कस्बा बाजार स्थित पक्का बलुआ घाट गंगा नदी तट पहुंचकर पहले स्नान किए उसके बाद पवित्र जल लेने के बाद प्रस्थान किए। कांवड़ यात्रा के दौरान भक्त केसरिया वस्त्र पहनकर, बम-बम भोले के जयकारों के साथ गंगाजल लेकर अपने शिवालयों में जलाभिषेक के लिए प्रस्थान किए। महाशिवरात्रि (बैसाखी/फाल्गुन शिवरात्रि) के पावन अवसर पर शिवभक्त कांवड़ियों के जत्थे पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ पक्का बलुआ घाट गंगा नदी के तटों पर पहुंचे। जिसके बाद पवित्र जल भरकर अपने गंतव्य शिवालयों की ओर यात्रा शुरू किया। हैं। कांवड़िए गंगा नदी से जल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए लंबी पदयात्रा करते हैं। पुजारी उद्धव पांडेय ने बताया कि हर हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों के साथ केसरिया वस्त्र धारण किए शिवभक्तों का उत्साह चरम पर होता है। सुरक्षा व्यवस्था: प्रशासन द्वारा कांवड़ियों की सुरक्षा और यात्रा को सुगम बनाने के लिए गंगा किनारे कोतवाली पुलिस द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए। हैं। यह यात्रा आस्था और श्रद्धा का एक बड़ा प्रतीक है।