सुकन्या सिंह की रिपोर्ट
वाराणसी।आध्यात्मिक नगरी वाराणसी में हार्टफुलनेस संस्था द्वारा आयोजित होने जा रहे ‘ग्रीन हार्टफुलनेस’ कार्यक्रम को लेकर एक विशेष प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्था के मार्गदर्शक पूज्य दाजी (कमलेश डी. पटेल) के विचारों को साझा करते हुए बताया गया कि “हार्टफुलनेस की पवित्रता ही व्यक्ति के भाग्य का निर्माण करती है।” उनके स्वागत को लेकर शहर में उत्साह का माहौल है और आयोजकों ने इसे अपने लिए गौरव का विषय बताया।
यह तीन दिवसीय कार्यक्रम 15 अप्रैल से 17 अप्रैल तक सारनाथ स्थित श्री रामचंद्र मिशन मेडिटेशन सेंटर, लेय योग आश्रम, हवेलिया चौराहा में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का संचालन हार्टफुलनेस संस्थान के मुख्यालय कान्हा शांति वनम्, हैदराबाद के निर्देशन में किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, इस कार्यक्रम में लगभग 1000 से लेकर 3000 लोगों के शामिल होने की संभावना है।
प्रेस वार्ता के दौरान माया सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि वाराणसी सेंटर द्वारा इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय निवासियों को ध्यान (मेडिटेशन) के माध्यम से जोड़ना और उन्हें इसके लाभों से अवगत कराना है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल गाइड के सानिध्य में ध्यान करने का अवसर लोगों के लिए विशेष अनुभव होगा। इसके अलावा, कार्यक्रम के बाद भी सारनाथ स्थित केंद्र पर नियमित रूप से ध्यान सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिससे इच्छुक लोग निरंतर अभ्यास कर सकें।
कार्यक्रम में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों जैसे देवरिया, जौनपुर, गाजीपुर, भदोही, आजमगढ़, प्रयागराज (इलाहाबाद) और गोरखपुर से बड़ी संख्या में प्रतिभागियों के आने की संभावना जताई गई है। साथ ही, बिहार से भी लोगों की सहभागिता लगातार बढ़ रही है। आयोजन की व्यवस्था और समन्वय का जिम्मा कोऑर्डिनेटर दीपक जायसवाल को सौंपा गया है, जो प्रतिभागियों की सुविधा और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
माया सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि नियमित मेडिटेशन से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः आने लगते हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को सही और गलत का ज्ञान होता है, लेकिन उसे अपनाने या छोड़ने में कठिनाई होती है। ध्यान के नियमित अभ्यास से नकारात्मक विचार और अनावश्यक आदतें धीरे-धीरे अपने आप समाप्त हो जाती हैं। इससे व्यक्ति के व्यवहार, सोच और जीवनशैली में सुधार आता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में जहां समाज में ईर्ष्या और द्वेष की भावना बढ़ रही है, वहां हार्टफुलनेस जैसी संस्था लोगों को आपस में जोड़ने और प्रेम एवं सद्भाव का संदेश देने का कार्य कर रही है। संस्था से जुड़ने के बाद व्यक्ति की बॉडी लैंग्वेज, संवाद शैली और व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव दिखाई देता है, जिससे अन्य लोग भी प्रभावित होकर इस मिशन से जुड़ने के लिए प्रेरित होते हैं।
अंततः, यह कार्यक्रम न केवल ध्यान और आध्यात्मिकता को बढ़ावा देगा, बल्कि समाज में शांति, प्रेम और सकारात्मकता का संदेश भी प्रसारित करते है