वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र गुप्ता
वाराणसी — वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर बढ़ते ऊर्जा संकट और गैस आपूर्ति में आ रही दुश्वारियों के बीच भारत जैसे विकासशील देश के लिए स्थानीय और सस्ते ऊर्जा स्रोतों को अपनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। ऐसे में गोबर गैस (बायोगैस) एक प्रभावी सुलभ और टिकाऊ विकल्प के रूप में अपनाया जा सकता है। उक्त बातें उदय प्रताप कॉलेज के रक्षा अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष अग्नि प्रकाश शर्मा ने एक अनौपचारिक वार्ता के दौरान कही। उन्होंने बताया कि गोबर गैस का निर्माण मुख्यतः गोबर और कृषि अपशिष्ट के ऑक्सीजन रहित अपघटन से होता है। इससे उत्पन्न मीथेन (CH4) गैस अत्यधिक ज्वलनशील होता है। जिसका उपयोग आसानी से खाना पकाने, बिजली उत्पादन और अन्य दैनिक कार्य में किया जा सकता है।खास बात यह है कि इसका उत्पादन ग्रामीण स्तर पर कम खर्चे में संभव है, जिससे हर घर और हर गांव ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है। वर्तमान ऊर्जा समस्या को देखते हुए गोबर गैस प्लाण्ट को बड़े स्तर पर बढ़ावा देना समय की आवश्यक मांग है। गौशालाओं, पशुपालन केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी स्थापना को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में भी जहां कृषि व डेयरी विभाग है।वहां गोबर गैस प्लाण्ट की स्थापना को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। यदि सरकार सौर ऊर्जा की तरह इस क्षेत्र में भी सब्सिडी प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान करे तो इसका व्यापक प्रचार-प्रसार संभव है। गोबर गैस के प्रमुख निम्नलिखित लाभ हैं। यह एक सस्ता और स्थानीय रूप से उपलब्ध होने वाला ईंधन है। एलपीजी और पीएनजी पर निर्भरता कम करता है।यह पर्यावरण के अनुकूल है और प्रदूषण को कम करता है। इससे निकलने वाली स्लरी (सड़ा गोबर) उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद होती है, जिसे जैविक खेती के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। किसानो की आय बढ़ाने में यह बहुत ही सहायक है। पशुपालन को लाभकारी बनाता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है। गौशालाओं एवं शैक्षणिक संस्थानों के लिए अधिक आय का स्रोत बन सकता है। ग्रामीण भारत में गोबर गैस का उपयोग ना केवल ऊर्जा की समस्या का समाधान कर सकता है, बल्कि यह स्वच्छता, कृषि और रोजगार के क्षेत्र में भी एक सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। कुल मिलाकर गोबर गैस एक ऐसा सरल सुलभ और प्रभावी समाधान है जो कम खर्चे में ऊर्जा उपलब्ध कराकर देश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वर्तमान समय में इसे बढ़ावा देना ना केवल आवश्यक ही है बल्कि यह भारत के सुरक्षित और सतत भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।