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बार एसोसिएशन के सभी अधिवक्ताओं ने मंगलवार को भी धरना पर बैठने को मजबूर रहे।

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सलीम मंसूरी की रिपोर्ट

जमानिया। तहसील प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच चल रहा गतिरोध अब निर्णायक मोड़ पर आ गया है। उपजिलाधिकारी की कार्यशैली और कथित अमर्यादित व्यवहार से क्षुब्ध होकर बार एसोसिएशन जमानिया ने अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। शुक्रवार को बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने हुंकार भरते हुए स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती और उपजिलाधिकारी अपने व्यवहार के लिए माफी नहीं मांगते। तब तक तहसील गेट के सामने प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक धरना और नारेबाजी जारी रहेगी। मंगलवार को तहसील मुख्यालय के गलियारे में अधिवक्ताओं ने धरना दी। बताया जा रहा है। कि विवाद की जड़ 30 मार्च को हुई बार-बेंच की बैठक है।जिसमें अधिवक्ताओं ने वादकारियों के हित में 19 सूत्रीय मांगें रखी थीं। अधिवक्ताओं का आरोप है कि एसडीएम द्वारा इन मांगों पर लिखित सूचना देने के बजाय टाल मटोल किया गया। आक्रोश तब और बढ़ गया जब 13 अप्रैल को महामहिम राष्ट्रपति को पत्रक सौंपने के दौरान उपजिलाधिकारी पर अधिवक्ताओं के साथ अभद्र और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगा। बार एसोसिएशन का कहना है कि उन्होंने 16 अप्रैल को इस संबंध में अनुस्मारक पत्र भी दिया था। लेकिन प्रशासन ने समस्याओं के समाधान के बजाय उच्च न्यायालय और शासन की मंशा की दुहाई देते हुए। अधिवक्ताओं को कथित तौर पर धमकी भरा सूचना पत्र भेज दिया। अधिवक्ताओं ने अब अपनी मांगों का दायरा बढ़ाते हुए सात सूत्रीय नया प्रस्ताव पारित किया है। उनकी प्रमुख मांगों में तहसील के विभिन्न न्यायालयों और कार्यालयों में कार्यरत प्राइवेट कर्मियों को तत्काल हटाना, न्यायालय की पत्रावलियों में सुनवाई हेतु समान तिथि निर्धारित करना और तहसीलदार जमानियां द्वारा समय से पूर्व बैठक कर पारित किए गए प्रतिकूल आदेशों को वापस लेना शामिल है। इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता घनश्याम सिंह और मकरध्वज सिंह के लंबे समय से लंबित प्रकरणों के निस्तारण की भी मांग की गई है। धरना प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव ने संयुक्त रूप से कहा कि अधिवक्ता समाज के साथ-साथ वादकारियों के हितों की रक्षा के लिए यह लड़ाई लड़ी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार की वजह से न्याय प्रक्रिया बाधित हो रही है और प्राइवेट कर्मियों का बोलबाला बढ़ा हुआ है। जब तक प्रशासन लिखित रूप से माफी नहीं मांगता और मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं करता, आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन के कारण तहसील का प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो रहा है। इस अवसर अध्यक्ष जयप्रकाश राम, सचिव मुनेश सिंह, कमलकांत राय, उदय नारायण सिंह, मेराज हसन, फैसल होदा, अरविंद कुमार, पंकज तिवारी, दिग्विजय नाथ तिवारी, मिथिलेश सिंह, शशि भूषण राय, रवि प्रकाश, सुनील कुमार, बृजेश कुशवाहा, घनश्याम कुशवाहा, संजय यादव, रमेश यादव आजाद,कई अधिवक्ता शामिल रहे हैं।

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