सलीम मंसूरी की रिपोर्टजमानियां। गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के पानी के साथ बहकर आने वाली भारी मात्रा में जलकुंभी (Water Hyacinth) घाटों के किनारों पर जमा हो जाती है। इससे स्नानार्थियों के लिए गंगा में उतरना और डुबकी लगाना बेहद कठिन व खतरनाक हो गया है। स्नानार्थियों और आम जनजीवन पर स्नान करने में बाधा हो गई है। कस्बा बाजार स्थित पक्का बलुआ घाट के पास जलकुंभी का घना जाल बिछ जाने से श्रद्धालुओं को साफ पानी नहीं मिल पाता और पैर फंसने का डर रहता है। धार्मिक व सामाजिक कार्य प्रभावित होने लगी है। स्नान के अलावा अंतिम संस्कार और कर्मकांड के लिए श्मशान घाट पर आने वाले लोगों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। नदी की सतह पर जलकुंभी पट जाने से मछुआरों की रोजी-रोटी पर संकट आ चुकी है। मानसून या बाढ़ के दौरान तेज बहाव के कारण पक्का बलुआ घाट गंगा नदी यह घास मुख्य धारा में आ जाती है। जिसके कारण रासायनिक कचरे से मिलने वाले पोषक तत्वों के कारण जलकुंभी बहुत तेजी से बढ़ती है। यह सब दृश्य देखने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर गंगा नदी में फैली जलकुंभी को साफ कराने व उसे हटवाने के लिए कार्यवाही नहीं किया जाता। आजाद वर्मा, रितेश वर्मा, उत्कर्ष बरनवाल, आशीष कुमार, श्रीकुमार वर्मा, मुन्ना गुप्ता, वीरेंद्र कुमार सहित आदि लोगों ने उपजिलाधिकारी एवं नगर पालिका परिषद के विभागीय अधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए। पक्का बलुआ घाट गंगा नदी में काफी मात्रा में फैली जलकुंभी को हटवाने या साफ कराने की मांग किया। ताकि स्नानार्थियों को स्नान करते समय कोई दिक्कत उठानी ना पड़े।