वाराणसी काशी दीप विजन :अविवाहित कन्याओं ने योग्य वर की कामना से शिव-पार्वती की पूजा की
शिवालयों-घरों में दिनभर गूंजते
रहे शिव-पार्वती के जयकारे
तीज पर बना गणेश
चौथ का दुर्लभ संयोग
वाराणसी। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर सोमवार को हरितालिका तीज का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर निर्जला व्रत रखा। वहीं अविवाहित कन्याओं ने योग्य वर की प्राप्ति के लिए माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना की।
इस बार तीज पर संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का विशेष संयोग बना। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र तथा प्रथम पूज्य हैं। तीज के साथ गणेश चतुर्थी के संयोग से मंदिरों और घरों में पूजा-अर्चना का माहौल और भी ज्यादा भक्तिमय दिखा।
पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों तक अन्न-जल त्यागकर कठोर तपस्या की थी। उनकी अटूट श्रद्धा और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी प्रसंग की स्मृति में महिलाएं तीज का व्रत रखती हैं।
सुबह से ही महिलाएं पारंपरिक परिधानों और 16 श्रृंगार में सजकर शिव-पार्वती और गणेश की पूजा में लीन दिखी। कई स्थानों पर बालू अथवा मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश की प्रतिमाएं बनाकर विधिवत पूजन किया गया। तीज व्रत कथा का पाठ करने के साथ महिलाओं ने सिंदूर, चूड़ी, बिंदी सहित सुहाग की सामग्री, फल और फूल माता पार्वती को अर्पित किए।श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, निरोगी काया और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की। दिनभर निर्जला व्रत के बाद महिलाएं रात में जागरण, भजन-कीर्तन करेंगी और अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण कर व्रत पूर्ण करेंगी।