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भारतीय गणतंत्र रक्षक संघ ने अपने मुख्यालय कन्दवा, वाराणसी पर बाबा साहब अंबेडकर के 69 वें परिनिर्वाण दिवस पर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की

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भारतीय गणतंत्र रक्षक संघ ने अपने मुख्यालय कन्दवा, वाराणसी पर बाबा साहब अंबेडकर के 69 वें परिनिर्वाण दिवस पर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित क। उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए संघ के अध्यक्ष डॉ उमेश चंद्र ने बाबा साहब के जाति-पाति-तोड़क मंडल लाहौर के लिए तैयार किए गए भाषण जिसका शीर्षक ‘एनीहिलेशन आफ कॉस्ट’ (जातियों का उच्छेद) पर चर्चा की। डॉ उमेश चंद्र ने बताया कि बाबा साहब के इस भाषण का पूरा सारांश यहीं पर टिका है कि समता, स्वतंत्रता और बंधुता को विकसित किए बगैर जातियों के दुष्प्रभाव को समाप्त नहीं किया जा सकता। बाबा साहब ने स्पष्ट किया है कि हमें ऐसे धर्म की आवश्यकता है जो समता, स्वतंत्रता और बंधुता पर आधारित हो और ऐसा स्वदेशी धर्म केवल एक ही है और वह है बौद्ध धर्म। यह धर्म मानव को एक समान देखता है, कोई भेदभाव सामाजिक स्तर पर नहीं करता । यहां ऊंच- नीच की जगह नहीं है। डॉ उमेश चंद्र ने बताया कि बाबा साहब द्वारा दिल्ली आकाशवाणी पर 3 अक्टूबर 1954 को दिए गए भाषण जिसका शीर्षक है ‘मेरा जीवन दर्शन’ में भी स्पष्ट किया है कि राजनीतिक रूप से समता, स्वतंत्रता और बंधुता को लक्ष्य बनाया गया है लेकिन सामाजिक रूप से जहां तथाकथित सनातनी विचारधारा का प्रभाव है, वहां समता,स्वतंत्रता और बंधुता को नकारा गया है; लेकिन उन्होंने आशा व्यक्त की है कि एक दिन समता, स्वतंत्रता और बंधुता को सामाजिक लक्ष्य अवश्य बनाया जाएगा।उन्होंने बताया कि ‘भारतीय गणतंत्र रक्षक संघ’ इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सामाजिक क्षेत्र में कार्य कर रहा है। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में संजीव गौड़, आर. डी. पाल, चंद्रभूषण प्रसाद, बृजेश कुमार, विकास कुमार वर्मा, अरुण कुमार वर्मा, विप्लव चंद्र आदि लोगों ने बाबा साहब के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके प्रति अपनी कृतज्ञता जाहिर की दिनेश कुमार सिंह की रिपोर्ट वाराणसी

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