भारतीय गणतंत्र रक्षक संघ* के द्वारा अध्यक्ष डॉ. उमेश चंद्र जी के नेतृत्व में भारतवर्ष में पर्यावरण को ताक पर रख, अस्थाई लाभ के लिए हो रहे जंगलों की कटाईपर रोष जाहिर करते हुए महामहीम राष्ट्रपति जी से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। ज्ञात हो कि विकास के नाम पर सिंगरौली (मध्य प्रदेश), हसदेव अरण्य (छत्तीसगढ़), ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट (अंडमान-निकोबार), महाराष्ट्र के गढ़चिरौली और चंद्रपुर तथा सोनभद्र (उत्तर प्रदेश)और अरावली माला में लगभग 20 लाख से ज्यादा वयस्क पेड़ों को काटने की योजना पर कार्य चल रहा है। सिंगरौली और हसदेव अरण्य में हजारों पेड़ कट चुके हैं। ग्रेट निकोबार दीप एक भूकंप प्रभावित क्षेत्र है और वहां पर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई हो रही है । इससे जैव विविधता का नुकसान होगा, मिट्टी कटाव बढ़ेगा, जल स्रोत (जैसे नदियां और भूजल) प्रदूषित होंगे और स्थानीय जलवायु पर असर पड़ेगा । औद्योगिक विकास से वायु प्रदूषण, धूल और रासायनिक उत्सर्जन बढ़ सकता है। पेड़ों के कटाई से कार्बन सिंक घटेगा और भूमंडलीय तापमान बढ़ेगा। स्थानीय आदिवासी और ग्रामीण समुदायों (जैसे कोल, गोंड,बैगा, शैम्पेन और निकोबारी जनजातियों) की आजीविका और परिवेश पर असर, जो जंगल से इंधन, चारा, औषधीय पौधे और वन उत्पादों पर निर्भर है। हजारों परिवार विस्थापित हो सकते हैं और पुनर्वास की कोई ठोस योजना नहीं है।मानव-वन्यजीव संघर्ष का बढ़ना, स्वास्थ्य समस्याएं (प्रदूषण से) और सामाजिक अशांति तय है। बड़े उद्योगपतियों को सस्ती भूमि और संसाधन मिलेंगे जबकि आदिवासी समुदायों का जल,जंगल और जमीन का अधिकार छिन जाएगा। सरकार इसको विकास का नाम दे रही है लेकिन यह कॉर्पोरेट हितों को प्राथमिकता देता है। ज्ञापन संजीव गौड़ ,विकास कुमार वर्मा अरुण कुमार वर्मा, बृजेश कुमार, अमित बौद्ध, चंद्रभूषण प्रसाद आदि की उपस्थिति में जिलाधिकारी महोदय के प्रतिनिधि को सोपा गया। विज्ञापन हेतु संपर्क सूत्र 98 39046 350