वाराणसी। शिक्षाशास्त्र विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में शुक्रवार को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड द्वारा समर्थित जागरूकता कार्यक्रम ‘युवा नागरिकों के लिए वित्तीय शिक्षा’ का आयोजन किया गया। इस मौके पर विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेन्द्र राम ने कहा कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु उनमें सामाजिक आर्थिक जागरूकता की आवश्यकता होती है क्योंकि धन बचाना ही धन कमाना है। व्यक्ति को धन कमाने, खर्च करने तथा बचाने की योग्यता एवं कौशल का विकास करना आर्थिक जागरूकता का प्रमुख लक्ष्य है। वित्तीय शिक्षा के अंतर्गत वित्तीय ज्ञान, अभिवृति एवं आवश्यक कौशलों से युक्त करती है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को वित्तीय रूप से जागरूक करने के उद्देश्य से 12 अप्रैल, 1988 में सेबी की स्थापना की गई थी, जिसे 30 जनवरी, 1992 को संवैधानिक निकाय का दर्जा प्रदान किया गया। प्रशिक्षक दीपक कुमार ने वित्तीय शिक्षा के विविध पक्षों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पूंजी बाजार में अनेक प्रकार के जोखिम होते है, जिसके संबंध में सम्यक जानकारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की अमूल्य निधि होते हैं, जिनको उचित रुप में प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है, जिससे वे अपनी पूंजी को सही योजना में निवेश कर अधिकतम लाभ कमा सके और अपने परिवार, समाज एवं राष्ट्र को आत्मनिर्भर एवं उन्नत बनाने में अपना अमूल्य योगदान सुनिश्चित कर सके। प्रशिक्षक मोनी सहाय ने विद्यार्थियों को वित्तीय कठिनाइयों एवं उससे उभरने के लिए विभिन्न उपायों को बताया। उन्होंने कहा कि वित्तीय बाजार एक अथाह सागर है, जिसमें उतरने के पूर्व हमें सम्यक सूचना एवं तैयारी आवश्यक है। संचालन डॉ. दिनेश कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन अजीत ने किया। इस अवसर पर बी.एड एवं एम.एड के विद्यार्थीगण उपस्थित रहे। साक्षी सिंह की रिपोर्ट वाराणसी