वाराणसी-संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले बनारस के समस्त बिजली कर्मियों ने गुरुवार को सिगरा स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर बिजली के निजीकरण और बिजली कर्मियों के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जाने के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि राज्य सरकार और संघर्ष समिति के बीच हुए समझौते के विपरीत स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन द्वारा 25 नवंबर 2024 को पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का एकतरफा ऐलान किए जाने के बाद से पिछले 13 महीनों से बिजली कर्मी आंदोलनरत हैं। अब 24 दिसंबर 2025 को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा द्वारा विधानसभा में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि निजीकरण का कोई निर्णय नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब निजीकरण का कोई फैसला ही नहीं था, तो उसका ऐलान क्यों किया गया।संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि निजीकरण के नाम पर अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन की नियुक्ति की गई, जिस पर करोड़ों रुपये खर्च हुए। इसी कंसल्टेंट से निजीकरण का आरएफपी दस्तावेज तैयार कराया गया, जिसे विद्युत नियामक आयोग ने आपत्ति के साथ लौटा दिया। वक्ताओं ने यह भी कहा कि निजीकरण के नाम पर ही निदेशक वित्त के पद पर विवादित निधि नारंग को तीन बार सेवा विस्तार दिया गया, जिससे पावर कॉरपोरेशन को नुकसान हुआ।वक्ताओं ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे बिजली कर्मियों पर पिछले 13 महीनों में पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने कई उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां कीं, जिससे ऊर्जा निगमों का कार्य वातावरण पूरी तरह बिगड़ गया। संघर्ष समिति ने मांग की कि निजीकरण से जुड़ी समस्त प्रक्रियाएं तत्काल निरस्त की जाएं और बिजली कर्मियों पर की गई सभी दमनात्मक कार्रवाइयां वापस ली जाएं।
सभा में ई. मायाशंकर तिवारी, राजेन्द्र, ई. अवधेश मिश्रा, संदीप कुमार, राजेश सिंह, अजय मौर्य, जे.पी.एन. सिंह, जमुना पाल, अशोक कुमार, मनोज जैसवाल सहित बड़ी संख्या में बिजली कर्मी मौजूद।