*मशाल-ए-शिक्षा: अब डिग्
आज हमारा देश एक ऐसे दोराहे पर खड़ा है जहाँ एक तरफ ‘विश्वगुरु’ बनने का सपना है, तो दूसरी तरफ ‘शिक्षा माफिया’ और ‘महंगी फीस’ की बेड़ियाँ हैं। शिक्षा, जो किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होती है, आज मुनाफे के तराजू पर तौली जा रही है। संकट: जब शिक्षा ‘व्यापार’ बन गई आज गली-कूचों में खुले शिक्षण संस्थान ‘विद्या के मंदिर’ कम और ‘कॉर्पोरेट ऑफिस’ ज्यादा नजर आते हैं। बेतहाशा फीस वृद्धि ने मध्यम और निम्न वर्ग के मेधावी छात्रों के सपनों का गला घोंट दिया है। प्रभाव: एक गरीब मेधावी छात्र डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देखने से पहले अपने पिता के कर्ज के बोझ को देखने लगता है। यह केवल एक परिवार की हार नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की प्रतिभा की हार है। कुरीतियाँ: डिग्रियों की भीड़ में खोता कौशलहमारी शिक्षा व्यवस्था में ‘रट्टा मार’ पद्धति और ‘डिग्री मोह’ ने युवाओं को केवल कागजों का ढेर थमा दिया है। शिक्षा माफियाओं ने पेपर लीक और फर्जीवाड़े के जरिए ईमानदारी से मेहनत करने वाले छात्रों के भविष्य पर सेंध लगा दी है।. समाधान: जो बदलाव हम देखना चाहते हैंशिक्षा में क्रांति का मतलब केवल इमारतों का आधुनिक होना नहीं है, बल्कि:सस्ती शिक्षा: फीस का निर्धारण पारदर्शी हो और उसकी एक अधिकतम सीमा तय हो। कौशल आधारित ज्ञान: छात्र को केवल ‘क्या सोचना है’ नहीं, बल्कि ‘कैसे सोचना है’ सिखाया जाए।कठोर दंड: शिक्षा माफियाओं की संपत्ति जब्त हो और उन पर राष्ट्रद्रोह जैसा मुकदमा चले।माननीय शिक्षा मंत्री/प्रशासनिक अधिकारी,भारत सरकार/राज्य सरकार शिक्षा के व्यावसायीकरण को रोकने और सुधार हेतु युवाओं का मांग पत्।हम देश के सजग युवा और छात्र, इस पत्र के माध्यम से शिक्षा जगत की विसंगतियों की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। एक न्यायपूर्ण समाज के लिए हमारी निम्नलिखित मांगें हैं:फीस नियामक प्राधिकरण (Fee Regulatory Authority): निजी शिक्षण संस्थानों की फीस पर नियंत्रण के लिए एक स्वतंत्र निकाय बने, जो प्रतिवर्ष ऑडिट करे। एंटी-माफिया टास्क फोर्स: पेपर लीक और शिक्षा के नाम पर ठगी करने वालों के लिए विशेष ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ का गठन हो। डिजिटल पारदर्शिता: प्रत्येक संस्थान का खर्च और फैकल्टी का विवरण सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध हो। रोजगार गारंटी शिक्षा: पाठ्यक्रम को उद्योग की जरूरतों (Industry-Ready) के अनुसार बदला जाए ताकि डिग्री मिलते ही युवा बेरोजगार न भटके।देश के जागरूक छात्र एवं युवा वर्ग परिवर्तन की शुरुआत आपसे है!साथियों, यह लेख केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक क्रांति का बीज है। जब तक हम चुप रहेंगे, व्यवस्था हमें लूटती रहेगी। हमें सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक और क्लासरूम से लेकर संसद तक यह संदेश पहुँचाना होगा कि— “शिक्षा बेची नहीं जा सकती, यह हमारा अधिकार है!”
> > “महंगी फीस पे लगाम दो, युवाओं को सही काम दो!”
> “शिक्षा का व्यापार बंद करो, माफियाओं का संहार करो!”
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