मिर्जापुर जिले में मदरसों के आधुनिकीकरण के नाम पर बड़े पैमाने पर सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कई ऐसे मदरसे, जो केवल कागजों में संचालित थे, उन्हें भी करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। यह जांच आरटीआई कार्यकर्ता इरशाद अली की शिकायत पर गठित SIT द्वारा की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, चार वर्ष पूर्व जिले में 300 से अधिक मदरसे थे, जबकि वर्तमान में 161 मदरसे ही संचालित बताए जा रहे हैं। आधुनिकीकरण योजना के तहत 143 मदरसों में से 89 को चयनित किया गया था, लेकिन जांच में इनकी मंजूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। SIT ने पाया कि फर्जी मान्यता देकर 10 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया, वहीं शिक्षकों को बिना सत्यापन के मानदेय दिया गया।इस मामले में तीन तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, दो अन्य अधिकारी, दो क्लर्क, एक कंप्यूटर ऑपरेटर और 42 मदरसा प्रबंधकों को दोषी माना गया है। इनके खिलाफ धारा 409 और 120बी के तहत मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की गई है। जिला समाज कल्याण अधिकारी रामदत्त प्रजापति ने कहा कि मामला पुराना है और SIT की रिपोर्ट का आधिकारिक पत्र अभी प्राप्त नहीं हुआ है। कार्रवाई को लेकर अब प्रशासनिक निर्णय का इंतजार है। बाइट/जिला समाज कल्याण अधिकारी रामदत्त प्रजापति बाइट/आरटीआई कार्यकर्ता इरशाद अली