दिल्ली का एक इलाक़ा है वज़ीरपुर.और यहाँ के 12-17 साल के लड़कों का एक फेवरेट खेल हुआ करता था.पास की रेलवे लाइन से गुज़रने वाली हर ट्रैन पर पत्थर फेंकना….ऊँचे पजामे…. सर पर टोपी…वाले ये लड़के बाकायदा इस बात पर सट्टा लगाते कि किसका पत्थर चलती ट्रैन के मुसाफिर को घायल करेगा….. और इनके बड़े इन्हे इसके लिए रोकते नहीं थे…. इनाम देते थे…सालों से वज़ीरपुर में रेलवे की जमीन पर बनी अवैध झुग्गियों में रहने वाले ये कर रहे थे… रेलवे की चोरी… झपटमारी… पत्थरबाजी जानबूझ कर नाबालिग लड़कों का इस्तेमाल किया जाता था…. ताकि पकड़े भी जाएँ तो सख्त क़ानूनी एक्शन न हो…इन झुग्गियों में भरे पड़े थे बांग्लादेश के घुसपैठिये… रोहिंग्या…. बिहारी पक्की ज•हा®दी माइंडसेट के सारे खैर दिल्ली में सरकार बदली…. काम का नज़रिया बदला…और फिर दिल्ली सरकार ने बुलडोज़र लगा रेलवे की जमीन से ये अवैध अपराध का अड्डा ही पूरा साफ कर डाला….बांस का जंगल साफ……बांसुरी बजना बंद मीडिया, सोशल मीडिया पर एक तबका आपको रोता दिखेगा… सायद आपके भीतर भी दयाबेन जागे….तो बस कल्पना करना आप उस ट्रैन में हैं और बाहर खड़े लड़कों के हाथ में पत्थर और निशाना आपके बच्चे का स•र….