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आसमानी जंग’ में बनारस काइट क्लब का जलवा, फायर काइट को 4-0 से पटखनी 

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वशिष्ठ गोंड की रिपोर्ट वाराणसी

​वाराणसी : मां गंगा तट के किनारे में नीले आसमान में दो दिनों से जारी रंग-बिरंगी पतंगों का ‘जंग’ मंगलवार को बनारस काइट क्लब की शानदार जीत के साथ संपन्न हो गया। सेमीफाइनल के उतार-चढ़ाव और फाइनल के रोमांचक पेंच के बीच गंगा की रेती ‘भाक्काटे’ के शोर से गूंजती रही। खिताबी मुकाबले में बनारस काइट क्लब ने जबरदस्त कौशल दिखाते हुए फायर काइट क्लब को एकतरफा 4-0 से हराकर विजेता की ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।दूसरे दिन पहले दौर में सेमीफाइनल के मुकाबले खेले गए। पहले सेमीफाइनल में बनारस काइट क्लब ने अपनी सधी हुई डोर और कलाबाजी से एयर लाइन्स काइट क्लब को बाहर का रास्ता दिखाया। वहीं, दूसरे सेमीफाइनल में फायर काइट क्लब और स्काई लाइन काइट क्लब के बीच कांटे की टक्कर हुई, जिसमें हवा के रुख का सही अंदाजा लगाते हुए फायर काइट क्लब ने फाइनल में जगह बनाई।वहीं फाइनल मुकाबले में रोमांच अपने चरम पर था, लेकिन बनारस काइट क्लब के बंटी और शुभम की जोड़ी के आगे प्रतिद्वंद्वी टिक नहीं सके। अपनी महारत का लोहा मनवाते हुए बनारस क्लब ने प्रतिद्वंद्वी फायर काइट क्लब की पतंगों को एक के बाद एक चार बार काटा और 4-0 की अजेय बढ़त के साथ चैंपियन बने। समापन समारोह में महापौर अशोक कुमार तिवारी ने विजेताओं को शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया। इसमें बनारस काइट क्लब के बंटी व शुभम को प्रथम पुरस्कार, फायर काइट क्लब के समीर को द्वितीय पुरस्कार तथा एयर लाइन्स काइट तृतीय पुरस्कार पुरस्कार देकर सम्मानित किया । वहीं प्रथम को 51 हजार, द्वितीय को 21 हजार तथा तृतीय को 11 हजार रुपये पुरस्कार राशि 14 जनवरी को नगर निगम कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में प्रदान करने की घोषणा की। उधर विजेता टीम के शानदार प्रदर्शन से गदगद होकर आयोजन स्थल पर ही पार्षदों और समाजसेवियों ने नकद पुरस्कारों की झड़ी लगा दी। अजय शंकर तिवारी ‘गुड्डू’ व पार्षद विजय द्विवेदी ने 2500-2500, शंभू निषाद ने 2100, अजय त्रिवेदी ने 2000, सत्यनारायण साहनी ने 1500, जगन्नाथ ओझा ने 1100 तथा सोमनाथ यादव ने 1000 रुपये का नकद पुरस्कार देकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। *अब राष्ट्रीय स्तर पर सजेगा पतंगबाजी का महाकुंभ: महापौर*गंगा की रेती पर पतंगबाजी के सफल आयोजन के बाद महापौर अशोक कुमार तिवारी ने भविष्य के लिए बड़ा विजन साझा किया है। उन्होंने घोषणा की कि “काशी की पतंगबाजी की परंपरा को हम वैश्विक पटल पर ले जाएंगे। अगले वर्ष से यह आयोजन केवल स्थानीय न होकर ‘नेशनल इवेंट’ बनेगा। युवा रील की आभासी दुनिया छोड़ मैदान के रोमांच से जुड़ें, इसके लिए हम पुरस्कार राशि में दस गुना वृद्धि कर रहे हैं।” महापौर ने बताया कि अगले वर्ष होने वाली इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के माध्यम से देशभर के दिग्गज पतंगबाजों को काशी आमंत्रित किया जाएगा। युवाओं और खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन के लिए पुरस्कार राशि को बढ़ाकर ऐतिहासिक स्तर पर ले जाया जाएगा, जिसमें प्रथम विजेता को 5 लाख रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले को 2.51 लाख रुपये और तृतीय स्थान पर रहने वाले प्रतिभागी को 1.51 लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने जोर दिया कि इस पहल से काशी की पुरातन खेल संस्कृति को नई ऊंचाई मिलेगी। मोबाइल के चक्कर में अपनी जड़ों को न भूलें युवा: उपसभापति*इस अवसर पर नगर निगम के उपसभापति नरसिंह दास ने आधुनिक जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि, तकनीक और मोबाइल के इस दौर ने हमारे पारंपरिक आउटडोर खेलों को हाशिए पर धकेल दिया है। आज का युवा मैदान की ताजी हवा और पतंगबाजी जैसे रोमांचक खेलों के बजाय बंद कमरों में स्क्रीन पर समय बिताना ज्यादा पसंद कर रहा है। यह न केवल हमारी शारीरिक सेहत के लिए नुकसानदेह है, बल्कि इससे हमारी सांस्कृतिक विरासत भी विलुप्त हो रही है। पतंगबाजी जैसे आयोजन हमें फिर से मैदानों की ओर लौटने और अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश देते हैं। हमें अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए इन पारंपरिक खेलों को सहेज कर रखना होगा । समापन समारोह में पार्षद, राम गोपाल, इंर्देश सिंह, खुशील गुप्ता, प्रवीन राय, श्रवण गुप्ता, अमरेश गुप्ता, भाजपा मंडल अध्यक्ष सोमनाथ यादव, जगरन्नाथ ओझा सहित अन्य लोग उपस्थित थे ।

*चूड़ा-मटर व गाजर के हलवे ने बढ़ाई रेती की रौनक*

​ गंगा की रेती पर जहाँ एक ओर आसमान में पतंगों के बीच ‘आसमानी युद्ध’ छिड़ा था, वहीं दूसरी ओर रेती की ठंडी हवाओं के बीच प्रतिभागियों और दर्शकों के लिए बनारसी चूड़ा-मटर और गरमा-गरम गाजर के हलवे का खास इंतजाम किया गया था। ​खिलाड़ियों ने पतंगबाजी के साथ-साथ देशी घी में डूबे गाजर के हलवे और मटर की सोंधी खुशबू वाले चूड़ा-मटर का जमकर लुत्फ उठाया। प्रथम पुरस्कार: बनारस काइट क्लब (बंटी व शुभम)द्वितीय पुरस्कार: फायर काइट क्लब (समीर)तृतीय पुरस्कार: एयर लाइन्स काइट क्लब (वॉकओवर)

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